क्या भारत में भीड़तंत्र कानून व्यवस्था के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन रहा है?
मोहित गौतम (दिल्ली) : भारत में पिछले कुछ वर्षों में ऐसी घटनाओं की संख्या बढ़ी है, जहां भीड़ ने कानून अपने हाथ में लेने की कोशिश की। कभी चोरी के शक में किसी व्यक्ति की पिटाई, कभी सोशल मीडिया अफवाहों के आधार पर हमला, तो कभी धार्मिक या राजनीतिक तनाव के दौरान हिंसा जैसी घटनाओं ने कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। विशेषज्ञ अब इसे केवल सामाजिक समस्या नहीं बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती मानने लगे हैं। विश्लेषकों का कहना है कि भीड़तंत्र तब पैदा होता है जब लोगों का एक समूह अचानक भावनात्मक प्रतिक्रिया में कानून और न्यायिक प्रक्रिया को नजरअंदाज करने लगता है। कई मामलों में देखा गया है कि सोशल मीडिया पर फैली अधूरी जानकारी या वायरल वीडियो लोगों को उकसाने का काम करते हैं। इसके बाद कुछ ही मिनटों में भीड़ इकट्ठा हो जाती है और स्थिति हिंसक रूप ले लेती है। कानून विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी लोकतंत्र में न्याय देने का अधिकार केवल अदालत और कानूनी संस्थाओं के पास होता है। लेकिन जब भीड़ फैसला सुनाने लगे, तो इससे न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता प्रभावित होती है। यही कारण है कि कई पूर्व...