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दिल्ली-NCR में प्रदूषण पर लगाम के लिए कड़े शीतकालीन नियम लागू: पुराने वाहनों के प्रवेश पर रोक, दोगुने पार्किंग शुल्क और 50% वर्क फ्रॉम होम के आदेश

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और उससे सटे एनसीआर क्षेत्रों में सर्दियों के मौसम में बढ़ने वाले वायु प्रदूषण से निपटने के लिए सरकार ने सख्त प्रतिबंधों और उपायों की शुरुआत कर दी है। 1 नवंबर से लागू किए गए इन नए प्रावधानों का मुख्य उद्देश्य वाहनों के धुएं और निर्माण कार्यों से होने वाले प्रदूषण को नियंत्रित करना है।

इन कड़े उपायों के तहत दिल्ली से बाहर पंजीकृत गैर-BS-VI (या बीएस-4 और उससे पुराने) मानक वाले पेट्रोल और डीजल वाहनों के राष्ट्रीय राजधानी में प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया गया है, हालांकि सीएनजी, इलेक्ट्रिक वाहनों और आपातकालीन सेवाओं को इससे छूट दी गई है। इसके अलावा, ट्रैफिक का दबाव कम करने के लिए सरकारी और निजी कार्यालयों में 50 प्रतिशत कर्मचारियों के लिए वर्क फ्रॉम होम (घर से काम) की व्यवस्था अनिवार्य की गई है, जबकि आवश्यक और आपातकालीन सेवाओं को इससे अलग रखा गया है।

प्रदूषण नियंत्रण की नीति के तहत भीड़भाड़ वाले इलाकों में निजी वाहनों के उपयोग को हतोत्साहित करने के लिए अधिकृत पार्किंग स्थलों पर शुल्क को दोगुना कर दिया गया है। साथ ही, धूल उड़ने वाले निर्माण और ध्वस्तीकरण (demolition) कार्यों पर भी रोक लगा दी गई है। यातायात को सुचारू बनाने के लिए नगर निगम (MCD) और दिल्ली सरकार के कार्यालयों के समय में भी बदलाव किया गया है, ताकि पीक ऑवर्स में ट्रैफिक जाम से बचा जा सके। प्रशासन द्वारा इन नियमों की निगरानी एएनपीआर (ANPR) कैमरों और एआई-सक्षम कमांड सेंटर के जरिए की जा रही है।

इजरायली चुनाव के बाद सरकार गठन पर मंडराया गतिरोध: अरब-यहूदी राजनीतिक गठबंधन और नई चुनौतियों पर गहराया सियासी संकट

इजरायल में हाल ही में संपन्न हुए राष्ट्रीय चुनावों के बाद देश की राजनीतिक स्थिति में एक बार फिर बड़ा गतिरोध उत्पन्न हो गया है। प्रारंभिक परिणामों के अनुसार, प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का दक्षिणपंथी और धार्मिक दलों का गठबंधन बहुमत के जादुई आंकड़े से पीछे रह गया है, जिसके चलते देश में नई सरकार के गठन को लेकर पेचीदा चुनौतियां खड़ी हो गई हैं।

120 सीटों वाली नेसेट (संसद) में किसी भी प्रमुख राजनीतिक गुट को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलने के कारण, अरब-नेतृत्व वाले दलों की भूमिका सबसे अहम मानी जा रही है। चुनाव में अरब दलों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल 19 सीटें हासिल की हैं। विपक्षी खेमे (गैड आइजेनकोट के नेतृत्व वाले गठबंधन) के पास भी अपने दम पर बहुमत का आंकड़ा नहीं है, जिसके कारण यदि विपक्ष को सत्ता में आना है, तो उसे अरब दलों के समर्थन पर निर्भर रहना पड़ सकता है या बाहर से उनके समर्थन की संभावना तलाशनी होगी।

हालांकि, इजरायली राजनीति में यह एक बेहद संवेदनशील और विवादास्पद मुद्दा बना हुआ है, क्योंकि कई यहूदी विपक्षी नेता भी खुलकर अरब पार्टियों के साथ सीधे गठबंधन करने से हिचकिचाते रहे हैं। इसके विपरीत, प्रधानमंत्री नेतन्याहू के धड़े ने अरब दलों के साथ किसी भी प्रकार की साझेदारी से साफ इनकार किया है। सेना में अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स यहूदियों की अनिवार्य भर्ती, क्षेत्रीय सुरक्षा, और गाजा संघर्ष जैसे गंभीर मुद्दों के बीच यह राजनीतिक अनिश्चितता आने वाले दिनों में इजरायल की घरेलू और विदेश नीति पर गहरा असर डालने वाली है।

कमजोर पड़ा चक्रवात ‘अरनब’: डिप्रेशन के रूप में दक्षिण छत्तीसगढ़-ओडिशा पर मौजूद, गंजम के पात्रपुर में रिकॉर्ड 546 मिमी बारिश दर्ज

भीषण चक्रवाती तूफान 'अरनब' (Cyclone Arnab) कमजोर पड़कर अब डिप्रेशन (अवदाब) के रूप में दक्षिण छत्तीसगढ़ और उससे सटे दक्षिण ओडिशा के ऊपर उत्तर दिशा की ओर बढ़ रहा है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, यह सिस्टम 29 अक्टूबर की शाम तक और कमजोर होकर उत्तर छत्तीसगढ़ तथा उत्तर-पश्चिम ओडिशा पर 'सुस्पष्ट निम्न दबाव क्षेत्र' (Well Marked Low Pressure Area) में तब्दील हो जाएगा। इस पूरी मौसमी गतिविधि पर रायपुर और संबलपुर के डॉपलर वेदर रडार से लगातार नजर रखी जा रही है।

पिछले 24 घंटों के दौरान इस तूफान के प्रभाव से दक्षिण ओडिशा, तटीय आंध्र प्रदेश, उत्तर तेलंगाना, छत्तीसगढ़, झारखंड और गंगीय पश्चिम बंगाल में भारी से अत्यंत भारी बारिश दर्ज की गई। दक्षिण ओडिशा में बारिश ने कई सालों के रिकॉर्ड तोड़ दिए। गंजम जिले के पात्रपुर में सर्वाधिक 546 मिमी (54.6 सेमी) असाधारण बारिश हुई, जबकि सोरडा में 503 मिमी, कंधमाल के जी. उदयगिरि में 462 मिमी, गजपति के महेंद्रगढ़ में 458 मिमी, सनाखेमुंडी में 388 मिमी और चिकिटी में 309 मिमी वर्षा रिकॉर्ड की गई।

इसके अलावा, मौसम विभाग ने बंगाल की खाड़ी में एक और नई मौसमी हलचल की पुष्टि की है। दक्षिण अंडमान सागर और आसपास के क्षेत्र में बना कम दबाव का क्षेत्र (Low Pressure Area) अगले 24 घंटों में अधिक मजबूत होकर सुस्पष्ट निम्न दबाव का रूप ले लेगा। इसके बाद अगले 24 घंटों में इसके और गहराकर दक्षिण-पूर्व बंगाल की खाड़ी के ऊपर चक्रवाती अवदाब (Depression) में तब्दील होने की संभावना है, जिस पर मौसम वैज्ञानिक लगातार नजर बनाए हुए हैं।

मौसम विभाग की चेतावनी: ओडिशा के गंजम में रिकॉर्ड 54.6 सेमी की असाधारण भारी बारिश, तटीय आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में भी जनजीवन प्रभावित

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, पिछले 24 घंटों में देश के पूर्वी और तटीय इलाकों में मूसलाधार बारिश ने भारी तबाही मचाई है। सबसे अधिक प्रभावित ओडिशा का गंजम जिला रहा, जहां 29 अक्टूबर 2026 की सुबह 8:30 बजे समाप्त हुए 24 घंटों के दौरान 54.6 सेंटीमीटर की अभूतपूर्व और असाधारण (Exceptionally Heavy) बारिश दर्ज की गई है।

मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, तटीय आंध्र प्रदेश और यनम में भी भीषण स्थिति बनी हुई है, जहां कई स्थानों पर 21 से 30 सेंटीमीटर तक अत्यंत भारी बारिश (Extremely Heavy Rainfall) दर्ज की गई है। इसके अलावा, गंगीय पश्चिम बंगाल, झारखंड, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना के कई जिलों में 7 से 11 सेंटीमीटर तक भारी बारिश (Heavy Rainfall) हुई है।

तटीय और निचले इलाकों में जलभराव की गंभीर स्थिति को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन टीमों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। मौसम विज्ञानियों का कहना है कि चक्रवाती हलचल और बंगाल की खाड़ी से आ रही नमी के कारण अगले कुछ घंटों तक इन राज्यों में मौसम का मिजाज ऐसा ही बने रहने की संभावना है।