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संवैधानिक मर्यादा, संस्थागत स्वायत्तता और बेआवाज होते जनमुद्दे: भारतीय राजनीति का बदलता परिदृश्य

मोहित गौतम (दिल्ली) : भारतीय लोकतंत्र इस समय एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है, जहां राजनीतिक दलों का ध्यान नीतिगत प्राथमिकताओं और जनकल्याणकारी योजनाओं से हटकर चुनावी जोड़-तोड़ और संस्थागत श्रेय लेने की होड़ पर केंद्रित होता दिख रहा है। हाल के घटनाक्रम चाहे वे संवैधानिक संस्थाओं के भीतर उठते मतभेद हों या विभिन्न राज्यों के उपचुनावों में पार्टियों द्वारा अपने ही प्रत्याशियों को पीछे खींचने के अप्रत्याशित निर्णय राजनीतिक परिदृश्य में एक गहराते अविश्वास की ओर इशारा करते हैं। जब चुनाव आयोग जैसी महत्वपूर्ण संस्थाओं की कार्यप्रणाली या निर्णयों पर सार्वजनिक रूप से सवाल खड़े होते हैं, तो इससे न केवल चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता प्रभावित होती है, बल्कि आम नागरिक का लोकतांत्रिक व्यवस्था पर भरोसा भी डगमगाता है।

दूसरी ओर, मुख्यधारा के राजनीतिक मंचों पर जनता से जुड़े बुनियादी सवाल पृष्ठभूमि में धकेले जा रहे हैं। देश का युवा आज भी पारदर्शी परीक्षा प्रणाली, समय पर भर्ती, शिक्षा के बुनियादी ढांचे और हॉस्टल जैसी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहा है। वहीं आम नागरिक बढ़ती महंगाई, स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच और स्थानीय बुनियादी समस्याओं से जूझ रहा है। इसके विपरीत, चुनावी रैलियों और संवाद कार्यक्रमों का फोकस अक्सर व्यक्तिगत छींटाकशी, अमर्यादित बयानों और भावनात्मक ध्रुवीकरण तक सीमित रह जाता है।

मुख्यधारा के राजनीतिक दलों के इस ढर्रे के कारण अब आम जनता और युवाओं के बीच एक नई राजनीतिक चेतना देखने को मिल रही है। छात्र राजनीति से लेकर स्थानीय चुनावों तक, निर्दलीय और बागी उम्मीदवारों की जीत यह साबित करती है कि मतदाता अब केवल बड़े राजनीतिक सिंडिकेट्स के सहारे नहीं रहना चाहता। यदि स्थापित राजनीतिक दलों ने समय रहते अपनी प्राथमिकताओं को पुनर्गठित नहीं किया और जनमुद्दों को केंद्र में लाने के बजाय गुटीय राजनीति को प्राथमिकता दी, तो यह लोकतांत्रिक परिपक्वता के लिए एक बड़ा झटका होगा। लोकतंत्र को सशक्त बनाने के लिए आवश्यक है कि राजनीतिक विमर्श का केंद्र 'व्यक्ति' न होकर 'नीति' और 'जवाबदेही' बने।

मूनक में धूमधाम से मनाया गया गणेश उत्सव, श्रद्धा के साथ किया गया विसर्जन

मूनक, 23 सितंबर (दर्शन शर्मा) : बाजार स्थित नर्वदेश्वर श्री शिव मंदिर में हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी समस्त नगरवासियों और मंदिर कमेटी के सहयोग से श्री गणेश उत्सव श्रद्धा और धूमधाम के साथ मनाया गया। 12 सितंबर को मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना के साथ भगवान श्री गणेश की प्रतिमा स्थापित की गई। उत्सव के दौरान प्रतिदिन सुबह पूजा-अर्चना तथा शाम को कीर्तन, भजन और आरती का आयोजन किया गया। आरती के उपरांत श्रद्धालुओं के लिए लंगर भी लगाया गया।

गणेश उत्सव के दौरान कैबिनेट मंत्री एडवोकेट वीरेंद्र गोयल तथा पूर्व वित्त मंत्री परविंदर सिंह ढींडसा भी मंदिर पहुंचे और भगवान श्री गणेश के चरणों में नमन किया। इस दौरान श्रद्धालुओं ने धार्मिक आयोजन में उत्साहपूर्वक भाग लिया।

21 सितंबर, सोमवार को भगवान श्री गणेश की प्रतिमा के विसर्जन के लिए शोभायात्रा निकाली गई। मुख्य बाजार सहित विभिन्न स्थानों पर श्रद्धालुओं और सामाजिक संस्थाओं की ओर से जलजीरा, ठंडे दूध तथा लाहौरी जीरे के लंगर लगाए गए। शोभायात्रा के दौरान श्रद्धालुओं ने ढोल-नगाड़ों और आतिशबाजी के बीच रंग-गुलाल उड़ाते हुए भगवान श्री गणेश के जयकारे लगाए।

शोभायात्रा टोहाना स्थित भाखड़ा हैंड तक पहुंची, जहां भगवान श्री गणेश की प्रतिमा को पंचामृत से स्नान करवाकर विधिवत पूजा-अर्चना और आरती की गई। इसके बाद श्रद्धालुओं ने गणपति बप्पा मोरया और अगले वर्ष जल्दी आना के जयकारों के साथ भगवान श्री गणेश की प्रतिमा का श्रद्धापूर्वक विसर्जन किया।

इस अवसर पर श्री राम मंदिर कमेटी की ओर से दही-भल्ले का लंगर भी लगाया गया। गणेश उत्सव कमेटी के सभी सदस्यों सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु और अन्य लोग उपस्थित रहे।

Khabar.com.IN

बैंक हड़ताल के बीच RBI का बड़ा फैसला: ग्राहकों को राहत देने के लिए 27 सितंबर रविवार को खुले रहेंगे बैंक

यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) द्वारा 28 से 30 सितंबर तक बुलाई गई 3 दिवसीय देशव्यापी हड़ताल को देखते हुए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने ग्राहकों के हित में बड़ा कदम उठाया है। लगातार 5 दिनों तक बैंकिंग सेवाएं ठप होने की आशंका के बीच RBI ने सार्वजनिक क्षेत्र के सभी बैंकों और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (RRBs) को 27 सितंबर (रविवार) को सामान्य रूप से चालू रखने की मंजूरी दी है। इस फैसले के तहत बैंक शाखाओं, कार्यालयों, एटीएम-लिंक ब्रांचों और करेंसी चेस्ट में रविवार को भी आम दिनों की तरह कामकाज होगा।

बैंक यूनियनें 'सप्ताह में 5 दिन काम' (5 Days Working) की मांग को लेकर अड़ी हुई हैं, जिसे टालने के लिए केंद्र सरकार और बैंक प्रबंधन लगातार बातचीत कर रहे हैं। 28 से 30 सितंबर के बीच चेक क्लीयरेंस, कैश जमा-निकासी, केवाईसी और कागजी कामकाज जैसी सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं, इसलिए बैंकों ने ग्राहकों को पहले ही अपने जरूरी काम निपटाने की सलाह दी है।

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