खाली होते गांव, बढ़ते शहर: क्या भारत एक नई सामाजिक क्रांति के दौर में है?
मोहित गौतम (दिल्ली) : भारत तेजी से बदल रहा है। एक समय था जब गांव देश की पहचान माने जाते थे, लेकिन आज बड़ी संख्या में लोग बेहतर रोजगार, शिक्षा और सुविधाओं की तलाश में शहरों की ओर रुख कर रहे हैं। यह बदलाव केवल जनसंख्या के स्थानांतरण तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत की सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक संरचना को भी बदल रहा है। यही कारण है कि विशेषज्ञ इसे एक नई सामाजिक क्रांति के रूप में देखते हैं। पिछले कुछ वर्षों में छोटे कस्बों और गांवों से बड़े शहरों की ओर पलायन लगातार बढ़ा है। युवाओं की प्राथमिकताएं बदल रही हैं। अब वे केवल पारंपरिक व्यवसायों या खेती पर निर्भर नहीं रहना चाहते, बल्कि तकनीक, सेवा क्षेत्र, उद्योग और डिजिटल अर्थव्यवस्था में अवसर तलाश रहे हैं। इससे शहरों की आबादी तेजी से बढ़ रही है, जबकि कई गांवों में युवा आबादी कम होती जा रही है। इस बदलाव का सकारात्मक पक्ष भी है। शहरों में रोजगार के अधिक अवसर, बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं, आधुनिक शिक्षा और डिजिटल सुविधाएं लोगों के जीवन स्तर को बेहतर बना सकती हैं। वहीं दूसरी ओर, तेजी से बढ़ती शहरी आबादी के कारण ट्रैफिक, प्रदूषण, आवास संकट और बुनियादी स...