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जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाने पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: नोटिस जारी कर केंद्र व दिल्ली पुलिस से मांगा जवाब

जंतर-मंतर को अधिकृत प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाने (डी-नोटीफाई करने) के दिल्ली पुलिस के फैसले के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी किया है। सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस से स्पष्टीकरण मांगा है कि जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल से हटाने का निर्णय किस आधार पर लिया गया है।

सुनवाई के दौरान अदालत ने पूछा कि क्या यह निर्णय सुप्रीम कोर्ट की किसी मौखिक टिप्पणी के प्रभाव में लिया गया या फिर सुरक्षा और उपयोगिता के आकलन के बाद लिया गया। इस पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को सूचित किया कि यह फैसला किसी टिप्पणी के आधार पर नहीं, बल्कि पूर्व में गठित एक विशेष समिति की विस्तृत समीक्षा रिपोर्ट के आधार पर लिया गया है।

इसके अलावा, प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई से जुड़ी विभिन्न अर्जियों पर सुनवाई करते हुए पीठ ने दिल्ली पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे हालिया प्रदर्शनों के सभी सीसीटीवी फुटेज और वीडियो रिकॉर्डिंग को सुरक्षित रखें। वहीं, सुनवाई के दौरान 12 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट तक किए गए मार्च और उससे जुड़ी अव्यवस्थाओं को लेकर शीर्ष अदालत ने कड़ी आपत्ति जताई और याचिकाकर्ता पक्ष से उनके आचरण को लेकर स्पष्टीकरण देने को कहा है।

मतदाता सूची के SIR विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई: राहुल गांधी समेत 13 विपक्षी नेताओं की याचिका पर कोर्ट ने जारी किए नोटिस

मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और मुख्य चुनाव आयुक्त से जुड़े विवादों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी समेत 13 विपक्षी नेताओं द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए सर्वोच्च अदालत ने संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किए हैं।

याचिका में SIR से जुड़े फैसलों और डेटा में बदलाव की स्वतंत्र जांच व ऑडिट कराने, हटाए गए मतदाताओं के नाम हटाने के कारण सार्वजनिक करने तथा फॉर्म-6 से जुड़े रिकॉर्ड उपलब्ध कराने की मांग की गई है। शुरुआत में रजिस्ट्री द्वारा इस याचिका में कुछ तकनीकी कमियां और दस्तावेज संबंधी आपत्तियां बताई गई थीं, जिन्हें दुरुस्त करने के बाद अदालत ने इसे अपने रिकॉर्ड में दर्ज किया।

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में हुए विरोध प्रदर्शनों, राजनीतिक मार्च और पुलिस कार्रवाई से जुड़े मामलों पर भी विचार किया। अदालत ने व्यवस्था और सुरक्षा से जुड़े पहलुओं पर संज्ञान लेते हुए संबंधित अधिकारियों को प्रदर्शन और मार्च से जुड़े सभी सीसीटीवी फुटेज व वीडियो सुरक्षित रखने के निर्देश दिए हैं ताकि न्यायिक प्रक्रिया में साक्ष्य के रूप में उनका उपयोग किया जा सके। मामले में आगे की कानूनी कार्यवाही और सुनवाई निर्धारित प्रक्रिया के तहत जारी रहेगी।

राष्ट्रपति भवन से बड़ा प्रशासनिक फेरबदल: छह राज्यों में नए राज्यपालों की नियुक्ति, राजेंद्र आर्लेकर को तमिलनाडु और ओम प्रकाश माथुर को केरल का प्रभार

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने देश के छह राज्यों में नए राज्यपालों की नियुक्ति और फेरबदल की घोषणा की है। राष्ट्रपति भवन द्वारा जारी आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, केरल के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर को तमिलनाडु का नियमित राज्यपाल नियुक्त किया गया है, जो अब तक वहां का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे थे। वहीं, सिक्किम के राज्यपाल ओम प्रकाश माथुर का स्थानांतरण कर उन्हें केरल का नया राज्यपाल बनाया गया है।

अन्य प्रमुख नियुक्तियों में, भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय महासचिव दुष्यंत गौतम को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किया गया है। पलामू से पूर्व लोकसभा सांसद ब्रज मोहन राम को ओडिशा का नया राज्यपाल बनाया गया है, जहां वे हरि बाबू कंभमपति का स्थान लेंगे।

इसके अलावा, राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग की पूर्व सदस्य डॉ. सुधा यादव को थावरचंद गहलोत के स्थान पर कर्नाटक का राज्यपाल नियुक्त किया गया है। मध्य प्रदेश के पूर्व सांसद डॉ. ढाल सिंह बिसेन को उत्तराखंड का नया राज्यपाल बनाया गया है। राष्ट्रपति भवन के अनुसार, ये सभी नियुक्तियां संबंधित पदभार ग्रहण करने की तिथि से लागू होंगी।

भारत की आर्थिक मजबूती पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बयान: कहा 'सुधार कोई मजबूरी नहीं, हमारा संकल्प हैं'

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की मजबूत आर्थिक स्थिति और नीतिगत सुधारों को लेकर बड़ा संदेश दिया है। उन्होंने अपने आधिकारिक संदेश में कहा कि देश का विदेशी मुद्रा भंडार (फॉरेक्स रिजर्व) 700 अरब डॉलर के आंकड़े को पार कर चुका है और वैश्विक स्तर पर भारत की बैंकिंग व्यवस्था सबसे मजबूत प्रणालियों में शामिल है। इसी आर्थिक स्थिरता और मजबूती का परिणाम है कि आज भारत की सॉवरेन रेटिंग में सुधार हो रहा है।

प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार स्पष्ट नीतिगत दिशा के साथ सुधारों को आगे बढ़ा रही है। वस्तु एवं सेवा कर (GST) के लागू होने से जटिल कर प्रणालियों को एक एकीकृत राष्ट्रीय बाजार में बदला गया है, दिवालियापन कानून (Insolvency Law) लागू किया गया है और श्रम कानूनों (Labour Codes) को सुगम बनाकर 29 कानूनों को चार सरल संहिताओं में समेकित किया गया है। इसके अलावा व्यापार से जुड़े सैकड़ों छोटे नियमों का सरलीकरण किया गया है।

प्रधानमंत्री ने जोर देते हुए कहा कि भारत में सुधारों का यह सफर निरंतर जारी है और देश की 'रिफॉर्म एक्सप्रेस' तीव्र गति से आगे बढ़ रही है। सरकार के लिए आर्थिक सुधार कोई मजबूरी नहीं, बल्कि देश की प्रगति के प्रति अटूट संकल्प है।