|
Latest Updates
Latest News Loading...

मूनक में डीएसपी राजेश स्नेही की केमिस्ट एसोसिएशन के साथ बैठक, प्रतिबंधित दवाएं न बेचने की अपील

मूनक, 27 अक्टूबर (दर्शन शर्मा) : डीएसपी राजेश स्नेही ने मूनक केमिस्ट एसोसिएशन के सदस्यों के साथ बैठक कर प्रतिबंधित दवाओं की बिक्री न करने और ड्रग विभाग की ओर से जारी निर्देशों का सख्ती से पालन करने की अपील की। बैठक में पंजाब के मौजूदा हालात को ध्यान में रखते हुए दवा विक्रेताओं को नियमों के प्रति जागरूक किया गया।

डीएसपी राजेश स्नेही ने केमिस्टों से अपील की कि वे पंजाब सरकार, पंजाब के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) और एसएसपी संगरूर की ओर से जारी निर्देशों का पालन करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि कोई भी केमिस्ट सरकार की ओर से प्रतिबंधित दवाओं की बिक्री न करे। साथ ही, ड्रग विभाग के निर्देशों के अनुसार दवाओं की खरीद और बिक्री का पूरा रिकॉर्ड रखा जाए, ताकि पारदर्शिता बनी रहे और नियमों का उल्लंघन न हो।

उन्होंने केमिस्टों से यह भी अपील की कि नशे के लिए इस्तेमाल की जाने वाली सिरिंज और अन्य संबंधित सामग्री नशे की लत से जूझ रहे लोगों को उपलब्ध न कराई जाए। उन्होंने कहा कि नशे की रोकथाम के लिए पुलिस प्रशासन के साथ-साथ समाज के प्रत्येक वर्ग का सहयोग आवश्यक है। समाज को बेहतर और नशामुक्त बनाने के लिए सभी को अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए।

डीएसपी ने केमिस्ट एसोसिएशन के सदस्यों से पुलिस प्रशासन और संबंधित विभागों के निर्देशों का पालन करते हुए सामाजिक हित में योगदान देने की अपील की। इस अवसर पर केमिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. फकीर चंद बंसल और सचिव प्रवीण मदान ने आश्वासन दिया कि एसोसिएशन सरकार के निर्देशों के अनुसार दवाओं की खरीद-बिक्री करेगी और प्रशासन को हरसंभव सहयोग प्रदान करेगी।

बैठक में डीएसपी के रीडर, सहायक थाना प्रभारी हरमेश सिंह तथा केमिस्ट एसोसिएशन के अन्य पदाधिकारी और सदस्य मौजूद रहे।

Khabar.com.IN

मानहानि मामले में कांग्रेस नेता राहुल गांधी को बड़ी राहत: सुल्तानपुर की एमपी-एमएलए कोर्ट ने किया बरी

साल 2018 में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ की गई टिप्पणी से जुड़े मानहानि मामले में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को बड़ी कानूनी राहत मिली है। सुल्तानपुर की विशेष एमपी-एमएलए अदालत ने सुनवाई पूरी होने के बाद सोमवार को राहुल गांधी को इस मामले में दोषमुक्त (बरी) कर दिया है।

यह मामला वर्ष 2018 में कर्नाटक विधानसभा चुनाव के दौरान बेंगलुरु में दिए गए एक भाषण से संबंधित था, जिसमें कथित टिप्पणियों को लेकर स्थानीय स्तर पर मानहानि की शिकायत दर्ज कराई गई थी। मामले में लंबी कानूनी प्रक्रिया, गवाहों के बयान और विभिन्न अदालतों में चली सुनवाइयों के बाद अंततः विशेष अदालत ने यह फैसला सुनाया।

फैसला सुनाए जाने के दौरान अदालत में कानूनी पक्ष और औपचारिकताएं पूरी की गईं। इस निर्णय से कांग्रेस नेतृत्व और समर्थकों को बड़ी राहत मिली है, जबकि कानूनी जानकारों के अनुसार अदालत द्वारा साक्ष्यों और तर्कों के आधार पर यह फैसला पारित किया गया है।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की टिप्पणी पर गरमाई राजनीति: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और बीजेपी नेताओं ने बोला तीखा हमला

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे द्वारा पटना में एक जनसभा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के परिवार और उनके दिवंगत पिता को लेकर की गई एक विवादित टिप्पणी पर देश भर में तीखा राजनीतिक टकराव शुरू हो गया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इस बयान को लेकर कांग्रेस पार्टी पर कड़ा हमला बोला है और इसे शालीनता एवं राजनीतिक मर्यादा की सारी सीमाएं लांघने वाला करार दिया है।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी लगातार हताशा और निराशा में डूबती जा रही है, जिसके चलते उसके नेता प्रधानमंत्री और उनके परिवार के खिलाफ अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं। भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय मंत्रियों समेत कई वरिष्ठ नेताओं ने भी इस बयान की कड़ी निंदा करते हुए कांग्रेस से सार्वजनिक माफी की मांग की है।

इस बीच, राजनीतिक विरोध के तहत भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं और कुछ स्थानों पर कानूनी कार्रवाई के लिए शिकायतें भी दर्ज कराई गई हैं। भाजपा नेताओं का कहना है कि राजनीतिक वैचारिक विरोध की एक मर्यादा होती है, लेकिन व्यक्तिगत और पारिवारिक स्तर पर की जाने वाली ऐसी टिप्पणियां कांग्रेस के राजनीतिक दिवालियापन को दर्शाती हैं।

सौरव दास और आशुतोष रांका मामले में दिल्ली हाईकोर्ट की सुनवाई: याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने याचिका वापस ली, अदालत ने की तल्ख टिप्पणियां

जंतर-मंतर पर प्रवेश और निषेधाज्ञा उल्लंघन मामले में गिरफ्तार कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की न्यायिक हिरासत और विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (SEM) अदालत के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने अपनी याचिका वापस लेने का आग्रह किया, जिसे हाईकोर्ट ने अनुमति दे दी।

अदालत में सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद की बेंच ने नेताओं की उम्र और पृष्ठभूमि पर चर्चा करते हुए कहा कि प्रदर्शन और असहमति जताने का अधिकार है, लेकिन शांति भंग होने की आशंका और सार्वजनिक व्यवस्था के मामलों में यह देखना भी महत्वपूर्ण हो जाता है कि प्रदर्शन करने वाले कौन हैं और उनकी मंशा क्या है। बेंच ने स्पष्ट किया कि याचिका वापस लेने के दौरान मामले के गुण-दोष पर कोई विधिक राय नहीं दी गई है।

इसके अलावा, अदालत ने जमानत बॉन्ड और शर्तों के उल्लंघन पर प्रक्रिया से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर सवाल उठाए। वहीं, दूसरी ओर संबंधित मामलों में आरोपियों को आगे की न्यायिक प्रक्रिया और सुनवाई के लिए SEM अदालत के समक्ष पेश किया जा रहा है, जहां कानूनी कार्यवाही जारी है।