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नभः स्पृशं दीप्तम्: शौर्य, समर्पण और राष्ट्र रक्षा के 94 वर्षों का स्वर्णिम प्रतीक

मोहित गौतम (दिल्ली) : प्रत्येक वर्ष 8 अक्टूबर का दिन संपूर्ण राष्ट्र के लिए केवल एक तिथि नहीं, बल्कि भारतीय वायु सेना के अदम्य साहस, अभेद्य वीरता और अटूट समर्पण को नमन करने का पावन अवसर होता है। वर्ष 1932 में स्थापित भारतीय वायु सेना आज अपने 94वें स्थापना दिवस के ऐतिहासिक पड़ाव पर खड़ी है। "नभः स्पृशं दीप्तम्" अर्थात् 'गर्व के साथ आकाश को छूना' के अमर ध्येय वाक्य को आत्मसात करते हुए भारतीय वायु सेना ने देश की संप्रभुता और सीमाओं की रक्षा में जो स्वर्णिम अध्याय लिखे हैं, वे हर भारतीय के हृदय में गर्व की अनुभूति कराते हैं।

इतिहास साक्षी है कि 1947-48 का कड़ाके की ठंड में हुआ लद्दाख अभियान हो, 1965 और 1971 के युद्धों में दुश्मन के दांत खट्टे करने वाले ऑपरेशन हों, या फिर कारगिल की दुर्गम चोटियों पर चलाया गया 'ऑपरेशन सफेद सागर' हमारे वायु योद्धाओं ने हर मोर्चे पर अपनी रणनीतिक श्रेष्ठता और सर्वोच्च बलिदान का परिचय दिया है। इसके अतिरिक्त, जब भी देश या विदेश में कोई प्राकृतिक आपदा आई है, चाहे वह उत्तराखंड की भीषण बाढ़ हो या कोविड महामारी के दौरान जीवनरक्षक दवाओं और ऑक्सीजन की आपूर्ति का संकट, वायु सेना ने 'ऑपरेशन राहत' जैसे अभियानों के जरिए हर विषम परिस्थिति में संकटमोचक की भूमिका निभाई है।

आज के आधुनिक दौर में, जब वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य और रणनीतिक चुनौतियां लगातार जटिल होती जा रही हैं, भारतीय वायु सेना का कायाकल्प भी बेहद तीव्र गति से हो रहा है। 'आत्मनिर्भर भारत' और स्वदेशीकरण के संकल्प के तहत राफेल, सुखोई-30 एमकेआई जैसे अग्रिम पंक्ति के लड़ाकू विमानों के साथ-साथ स्वदेशी 'तेजस', 'प्रचंड' लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर और आधुनिक सी-17 ग्लोबमास्टर जैसे परिवहन विमानों ने हमारी युद्धक क्षमता को एक नई ऊंचाई दी है।

अत्याधुनिक मिसाइल रक्षा प्रणालियों, उन्नत रडार नेटवर्क और ड्रोन तकनीक के समावेश ने हमारी वायु सीमा को अभेद्य सुरक्षा कवच प्रदान किया है। वायु सेना दिवस न केवल हमारे वायु वीरों के पराक्रम और बलिदान का स्मरण कराता है, बल्कि यह देश के प्रत्येक नागरिक को यह विश्वास दिलाता है कि जब तक हमारे गगन प्रहरी नीले आसमान में मुस्तैद हैं, भारत की अखंडता और सुरक्षा पूरी तरह सुरक्षित है। संपूर्ण देश अपने जांबाज वायु योद्धाओं के शौर्य को सलाम करता है।

दिल्ली के न्यू सीमापुरी में 5 मंजिला इमारत ढही: हादसे में 3 लोगों की मौत, 8 घायल; राहत और बचाव कार्य जारी

उत्तर-पूर्वी दिल्ली के न्यू सीमापुरी इलाके में बुधवार दोपहर एक 5 मंजिला रिहायशी इमारत अचानक ढह गई। इस भीषण हादसे में एक गर्भवती महिला और बच्चे समेत तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि 8 अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। इमारत गिरने से आसपास के दो से तीन मकान भी इसकी चपेट में आ गए, जिससे पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई।

दिल्ली अग्निशमन सेवा और स्थानीय पुलिस को दोपहर करीब 3:15 बजे घटना की सूचना मिली, जिसके बाद फायर ब्रिगेड, एनडीआरएफ और पुलिस की टीमों ने मौके पर पहुंचकर युद्धस्तर पर राहत और बचाव अभियान शुरू किया। स्थानीय निवासियों की मदद से मलबे से अब तक 11 लोगों को निकाला जा चुका है, जिन्हें तुरंत नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

अधिकारियों के अनुसार, करीब 25 गज के प्लॉट पर बनी यह इमारत काफी पुरानी थी और इसके ढहने से आसपास के निर्माणों को भी नुकसान पहुंचा है। मलबे में फंसे अन्य संभावित लोगों की तलाश के लिए स्निफर डॉग्स और तकनीकी उपकरणों की मदद ली जा रही है। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने सीमापुरी गोल चक्कर और आसपास के मार्गों पर आवाजाही को नियंत्रित किया है ताकि एम्बुलेंस और राहत वाहनों को रास्ता मिल सके।

जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के लिए 10 दिन पहले आवेदन अनिवार्य: दिल्ली पुलिस ने जारी किए नियम, सेंट्रल विस्टा में धरना पूरी तरह प्रतिबंधित

राष्ट्रीय राजधानी में शांतिपूर्ण प्रदर्शन और सार्वजनिक व्यवस्था के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में धरना या प्रदर्शन आयोजित करने से संबंधित दिशा-निर्देश जारी किए हैं। पुलिस के अनुसार, जंतर-मंतर पर किसी भी तरह के धरने या प्रदर्शन के लिए पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य होगा। आयोजकों को कार्यक्रम की तारीख से कम से कम 10 दिन पहले नई दिल्ली जिले के पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) को औपचारिक आवेदन देना होगा।

दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया कि ये नियम सुप्रीम कोर्ट द्वारा 2017 में 'मजदूर किसान शक्ति संगठन बनाम भारत सरकार एवं अन्य' मामले में दिए गए फैसले और उसके अनुपालन में वर्ष 2022 में जारी पुलिस स्टैंडिंग ऑर्डर के तहत लागू किए गए हैं। पुलिस का कहना है कि नागरिकों को शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार प्राप्त है, लेकिन संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा और बड़े जनसमूह के प्रबंधन के लिए तय कानूनी प्रक्रियाओं का पालन आवश्यक है।

इसके साथ ही पुलिस प्रशासन ने साफ किया है कि सेंट्रल विस्टा इलाके में किसी भी प्रकार के धरने या प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी जाएगी। इस प्रतिबंधित दायरे में इंडिया गेट, सी-हेक्सागन, मान सिंह रोड, जनपथ, कर्तव्य पथ और उनके आसपास के लॉन शामिल हैं। 2022 के स्टैंडिंग ऑर्डर के अनुसार, संभावित भीड़ की संख्या के आधार पर प्रदर्शनों के लिए अन्य वैकल्पिक स्थान निर्धारित किए गए हैं।