कैशलेस भारत की ओर बढ़ते कदम: फायदे ज्यादा या जोखिम?
मोहित गौतम (दिल्ली) : भारत में पिछले कुछ वर्षों के दौरान डिजिटल भुगतान का विस्तार अभूतपूर्व गति से हुआ है। आज मोबाइल फोन के जरिए कुछ ही सेकंड में पैसे भेजना, बिल भरना, खरीदारी करना और सरकारी सेवाओं का भुगतान करना आम बात बन गई है। गांव से लेकर महानगर तक डिजिटल लेनदेन की पहुंच लगातार बढ़ रही है। यह बदलाव केवल तकनीक का नहीं, बल्कि देश की आर्थिक सोच में आए परिवर्तन का भी संकेत है। कैशलेस व्यवस्था का सबसे बड़ा लाभ सुविधा है। लोगों को बड़ी मात्रा में नकदी लेकर चलने की आवश्यकता कम हो जाती है और भुगतान पहले की तुलना में कहीं अधिक तेज और आसान हो जाता है। छोटे दुकानदार, रेहड़ी-पटरी वाले व्यापारी और स्वरोजगार से जुड़े लाखों लोग भी अब डिजिटल भुगतान स्वीकार कर रहे हैं। इससे कारोबार में पारदर्शिता बढ़ी है और ग्राहकों के लिए भुगतान के विकल्प भी आसान हुए हैं। सरकार और वित्तीय संस्थानों का मानना है कि डिजिटल भुगतान से औपचारिक अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है। लेनदेन का रिकॉर्ड उपलब्ध होने से वित्तीय प्रणाली अधिक संगठित बनती है और कर व्यवस्था में भी पारदर्शिता बढ़ सकती है। साथ ही डिजिटल प्लेटफॉर्म के वि...