मोहित गौतम (दिल्ली) : हिंदू धर्म में पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता प्रकट करने का पावन पर्व 'पितृ पक्ष' 26 सितंबर से प्रारंभ हो चुका है, जो 10 अक्तूबर को सर्वपितृ अमावस्या के साथ समाप्त होगा। 15 दिनों तक चलने वाले इस श्राद्ध पक्ष में श्रद्धालु अपने पितरों की आत्मिक शांति के लिए पिंडदान, तर्पण, दान-पुण्य और ब्राह्मण भोज जैसे धार्मिक अनुष्ठान करेंगे। इस बार तिथियों की गणना के अनुसार एक विशेष संयोग बन रहा है, जिसके तहत चतुर्थी और पंचमी तिथि का श्राद्ध एक ही दिन यानी 30 सितंबर 2026 को किया जाएगा।
द्रिक पंचांग के अनुसार, 30 सितंबर को दोपहर 2:55 बजे तक चतुर्थी तिथि रहेगी और उसके तुरंत बाद पंचमी तिथि शुरू हो जाएगी, जो अगले दिन कुतुप मुहूर्त से पहले ही समाप्त हो जाएगी। धर्मशास्त्रों के अनुसार श्राद्ध कर्म दोपहर के समय ही फलदायी माना जाता है, इसलिए विद्वानों ने 30 सितंबर को ही दोपहर 12 बजे से 2 बजे के शुभ मुहूर्त में दोनों तिथियों का श्राद्ध संपन्न करने की सलाह दी है।