जंतर-मंतर पर CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन मामले में दिल्ली पुलिस का बड़ा एक्शन: दर्ज कीं 3 एफआईआर
डिजिटल नागरिकता, डेटा संप्रभुता और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के दौर में नागरिक अधिकारों की नई चुनौतियां
मोहित गौतम (दिल्ली) : 21वीं सदी के तीसरे दशक में भारत जिस तेजी से डिजिटल परिवर्तन की ओर बढ़ा है, उसने न केवल सार्वजनिक सेवाओं की पहुंच को आसान बनाया है बल्कि नागरिक जीवन के बुनियादी ढांचे को भी बदल दिया है। हालांकि, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), बड़े पैमाने पर डेटा संग्रह और एल्गोरिद्म आधारित निगरानी के इस नए दौर ने डिजिटल नागरिकता और डेटा संप्रभुता से जुड़े कई गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। जब किसी देश की अधिकांश आबादी की व्यक्तिगत पहचान, वित्तीय लेनदेन और सामाजिक व्यवहार का डेटा कुछ गिनी-चुनी वैश्विक और स्थानीय तकनीकी कंपनियों के सर्वर में दर्ज हो रहा हो, तो ऐसे में नागरिक गोपनीयता और लोकतांत्रिक स्वायत्तता के बीच संतुलन बनाए रखना एक मुख्य चुनौती बन गया है।
हाल के समय में जनसांख्यिकीय डेटा के प्रबंधन, ऑटोमेटेड डिसीजन मेकिंग सिस्टम (एआई द्वारा निर्णय लेने की प्रक्रिया) और डेटा ब्रीच की बढ़ती घटनाओं ने यह स्पष्ट कर दिया है कि बिना मजबूत सुरक्षा ढाँचे के डिजिटल प्रशासन नागरिकों के मौलिक अधिकारों के लिए जोखिम पैदा कर सकता है। जब चुनाव प्रक्रियाओं से लेकर सामाजिक कल्याण योजनाओं के वितरण तक में डिजिटल सत्यापन को प्राथमिक माध्यम बनाया जाता है, तो सर्वर डाउन होने या डेटा में गड़बड़ी के कारण सबसे अधिक प्रभावित समाज का अंतिम व्यक्ति होता है। ऐसे में 'डेटा प्रोटेक्शन एक्ट' जैसी विधायी व्यवस्थाओं को केवल कागज तक सीमित न रखकर उन्हें धरातल पर प्रभावी और नागरिक-केंद्रित बनाना समय की आवश्यकता है।
डेटा संप्रभुता का अर्थ केवल राष्ट्रीय सीमाओं के भीतर डेटा संग्रहित करना भर नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि नागरिक अपने डेटा के अंतिम स्वामी हों। यदि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और एल्गोरिद्म का उपयोग शासन में निष्पक्षता के बजाय निगरानी या नागरिक अधिकारों को सीमित करने के लिए होने लगेगा, तो यह लोकतांत्रिक परिपक्वता के विपरीत होगा। भारत को यदि वैश्विक डिजिटल क्रांति का नेतृत्व करना है, तो उसे एक ऐसा मॉडल प्रस्तुत करना होगा जहाँ तकनीकी नवाचार (Innovation) और नागरिक अधिकारों (Civil Liberties) का सह-अस्तित्व हो। लोकतंत्र की मजबूती इसी में है कि तकनीक नागरिक को सशक्त बनाए, न कि उसे एक अदृश्य डेटा प्वाइंट में बदलकर रख दे।
जंतर-मंतर पर CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन से पहले कड़े सुरक्षा इंतजाम: आप नेता सौरभ भारद्वाज हिरासत में, BNS धारा 163 लागू
राजधानी दिल्ली में 2 अक्टूबर को मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ प्रस्तावित विरोध-प्रदर्शन से पहले दिल्ली पुलिस ने सख्त कार्रवाई की है। जंतर-मंतर पर बिना अनुमति प्रदर्शन करने पहुंचे आम आदमी पार्टी (AAP) नेता सौरभ भारद्वाज समेत कई कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। इलाके में सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम करते हुए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNS) की धारा 163 लागू कर दी गई है और लगभग 5,000 पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है।
यह प्रदर्शन ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA), राज्यसभा सांसद मनोज झा और वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण द्वारा बुलाया गया था, जिसे आम आदमी पार्टी का भी समर्थन मिला। पुलिस ने जंतर-मंतर रोड, टॉल्स्टॉय मार्ग और अशोक रोड को मल्टी-लेयर बैरिकेडिंग से सील कर दिया है। सुरक्षा व्यवस्था और ट्रैफिक नियंत्रण को ध्यान में रखते हुए दिल्ली मेट्रो के 11 प्रमुख स्टेशनों के प्रवेश और निकास द्वार बंद कर दिए गए हैं, हालांकि प्रमुख जंक्शनों पर इंटरचेंज सुविधा चालू रखी गई है।
दिल्ली में सुरक्षा कारणों से लुटियंस और सेंट्रल दिल्ली के 11 मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश-निकास द्वार बंद, इंटरचेंज सुविधा जारी
दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) ने सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक निर्देशों के तहत लुटियंस और मध्य दिल्ली क्षेत्र के 11 प्रमुख मेट्रो स्टेशनों पर प्रवेश और निकास सेवाएं अगले आदेश तक बंद कर दी हैं। इन प्रभावित स्टेशनों में जनपथ, पटेल चौक, सेंट्रल सेक्रेटेरिएट, राजीव चौक, सेवा तीर्थ (पूर्व में उद्योग भवन), मंडी हाउस, लोक कल्याण मार्ग, आईएनए, चावड़ी बाजार, रामकृष्ण आश्रम मार्ग और नई दिल्ली शामिल हैं।
DMRC ने स्पष्ट किया है कि भले ही इन स्टेशनों के एंट्री और एग्जिट गेट बंद रहेंगे, लेकिन राजीव चौक, मंडी हाउस, आईएनए, नई दिल्ली और सेंट्रल सेक्रेटेरिएट जैसे प्रमुख जंक्शनों पर यात्रियों के लिए ट्रेन बदलने यानी इंटरचेंज की सुविधा सामान्य रूप से उपलब्ध रहेगी। सुरक्षा कारणों से उठाए गए इस कदम के चलते मध्य दिल्ली जाने वाले दैनिक यात्रियों को असुविधा का सामना करना पड़ सकता है, जिसके लिए मेट्रो प्रशासन ने यात्रियों को वैकल्पिक साधनों का उपयोग करने की सलाह दी है।
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