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जंतर-मंतर पर CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन से पहले कड़े सुरक्षा इंतजाम: आप नेता सौरभ भारद्वाज हिरासत में, BNS धारा 163 लागू

राजधानी दिल्ली में 2 अक्टूबर को मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ प्रस्तावित विरोध-प्रदर्शन से पहले दिल्ली पुलिस ने सख्त कार्रवाई की है। जंतर-मंतर पर बिना अनुमति प्रदर्शन करने पहुंचे आम आदमी पार्टी (AAP) नेता सौरभ भारद्वाज समेत कई कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। इलाके में सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम करते हुए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNS) की धारा 163 लागू कर दी गई है और लगभग 5,000 पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है।

यह प्रदर्शन ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA), राज्यसभा सांसद मनोज झा और वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण द्वारा बुलाया गया था, जिसे आम आदमी पार्टी का भी समर्थन मिला। पुलिस ने जंतर-मंतर रोड, टॉल्स्टॉय मार्ग और अशोक रोड को मल्टी-लेयर बैरिकेडिंग से सील कर दिया है। सुरक्षा व्यवस्था और ट्रैफिक नियंत्रण को ध्यान में रखते हुए दिल्ली मेट्रो के 11 प्रमुख स्टेशनों के प्रवेश और निकास द्वार बंद कर दिए गए हैं, हालांकि प्रमुख जंक्शनों पर इंटरचेंज सुविधा चालू रखी गई है।

दिल्ली में सुरक्षा कारणों से लुटियंस और सेंट्रल दिल्ली के 11 मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश-निकास द्वार बंद, इंटरचेंज सुविधा जारी

दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) ने सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक निर्देशों के तहत लुटियंस और मध्य दिल्ली क्षेत्र के 11 प्रमुख मेट्रो स्टेशनों पर प्रवेश और निकास सेवाएं अगले आदेश तक बंद कर दी हैं। इन प्रभावित स्टेशनों में जनपथ, पटेल चौक, सेंट्रल सेक्रेटेरिएट, राजीव चौक, सेवा तीर्थ (पूर्व में उद्योग भवन), मंडी हाउस, लोक कल्याण मार्ग, आईएनए, चावड़ी बाजार, रामकृष्ण आश्रम मार्ग और नई दिल्ली शामिल हैं।

DMRC ने स्पष्ट किया है कि भले ही इन स्टेशनों के एंट्री और एग्जिट गेट बंद रहेंगे, लेकिन राजीव चौक, मंडी हाउस, आईएनए, नई दिल्ली और सेंट्रल सेक्रेटेरिएट जैसे प्रमुख जंक्शनों पर यात्रियों के लिए ट्रेन बदलने यानी इंटरचेंज की सुविधा सामान्य रूप से उपलब्ध रहेगी। सुरक्षा कारणों से उठाए गए इस कदम के चलते मध्य दिल्ली जाने वाले दैनिक यात्रियों को असुविधा का सामना करना पड़ सकता है, जिसके लिए मेट्रो प्रशासन ने यात्रियों को वैकल्पिक साधनों का उपयोग करने की सलाह दी है।

लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता और बेआवाज होते जनमुद्दे: भारतीय राजनीति का बदलता विमर्श

मोहित गौतम (दिल्ली) : भारतीय लोकतंत्र इस समय एक बेहद संवेदनशील दौर से गुजर रहा है, जहां संवैधानिक संस्थाओं की साख और राजनीतिक विमर्श के गिरते स्तर पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। निर्वाचन आयोग (ECI) द्वारा मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर उपजा हालिया विवाद केवल एक प्रशासनिक या कानूनी बहस तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं की पारदर्शिता और संस्थागत स्वायत्तता पर गहराते संकट की ओर इशारा करता है। भले ही आयोग ने फुल-कमीशन बैठक के बाद सभी निर्णयों में सर्वसम्मति का दावा किया हो, लेकिन जिस तरह से इस मुद्दे पर राजनीतिक दलों ने एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाए हैं, उससे आम जनता के मन में व्यवस्था के प्रति अविश्वास की भावना और गहरी हुई है।

इस पूरे राजनीतिक घमासान का सबसे दुखद पहलू यह है कि सत्ता और विपक्ष की इस खींचतान में देश के वास्तविक जनमुद्दे पूरी तरह हाशिए पर धकेल दिए गए हैं। आज देश का युवा पारदर्शी भर्ती प्रणालियों, समय पर प्रतियोगी परीक्षाओं के आयोजन, बेहतर शिक्षा सुविधाओं और रोजगार के अवसरों के लिए संघर्ष कर रहा है। वहीं, आम नागरिक बुनियादी नागरिक सुविधाओं की बदहाली, महिला सुरक्षा की गंभीर स्थिति, स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और बढ़ती आर्थिक विषमता जैसे रोजमर्रा के संकटों से जूझ रहा है। इसके बावजूद, राजनीतिक मंचों और मीडिया कवरेज में नीतिगत बहस के बजाय व्यक्तिगत छींटाकशी, भावनात्मक मुद्दों का ध्रुवीकरण और चुनावी जोड़-तोड़ ही हावी दिखता है।

मुख्यधारा की राजनीति का जनमुद्दों से यह अलगाव लोकतंत्र की सेहत के लिए शुभ संकेत नहीं है। हाल के दौर में स्थानीय स्तर के चुनावों और छात्र राजनीति में युवाओं व निर्दलीय विकल्पों का बढ़ता रुझान यह साफ दर्शाता है कि आम मतदाता अब स्थापित राजनीतिक ढर्रे से असंतुष्ट है। यदि राजनीतिक नेतृत्व ने समय रहते अपनी प्राथमिकताओं को पुनर्गठित नहीं किया और संस्थागत गरिमा को बनाए रखने के बजाय गुटीय राजनीति को ही अपना आधार बनाए रखा, तो यह लोकतांत्रिक परिपक्वता के लिए एक बड़ा धक्का साबित होगा। लोकतंत्र को सशक्त बनाने के लिए आज यह बेहद जरूरी हो गया है कि राजनीतिक विमर्श का केंद्र बिंदु 'व्यक्ति और बयानबाजी' न होकर केवल 'नीति और जन-जवाबदेही' बने।

पितृ पक्ष 2026: 26 सितंबर से शुरुआत, जानिए क्यों एक ही दिन पड़ेंगे चतुर्थी और पंचमी के श्राद्ध

मोहित गौतम (दिल्ली) : हिंदू धर्म में पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता प्रकट करने का पावन पर्व 'पितृ पक्ष' 26 सितंबर से प्रारंभ हो चुका है, जो 10 अक्तूबर को सर्वपितृ अमावस्या के साथ समाप्त होगा। 15 दिनों तक चलने वाले इस श्राद्ध पक्ष में श्रद्धालु अपने पितरों की आत्मिक शांति के लिए पिंडदान, तर्पण, दान-पुण्य और ब्राह्मण भोज जैसे धार्मिक अनुष्ठान करेंगे। इस बार तिथियों की गणना के अनुसार एक विशेष संयोग बन रहा है, जिसके तहत चतुर्थी और पंचमी तिथि का श्राद्ध एक ही दिन यानी 30 सितंबर 2026 को किया जाएगा।

द्रिक पंचांग के अनुसार, 30 सितंबर को दोपहर 2:55 बजे तक चतुर्थी तिथि रहेगी और उसके तुरंत बाद पंचमी तिथि शुरू हो जाएगी, जो अगले दिन कुतुप मुहूर्त से पहले ही समाप्त हो जाएगी। धर्मशास्त्रों के अनुसार श्राद्ध कर्म दोपहर के समय ही फलदायी माना जाता है, इसलिए विद्वानों ने 30 सितंबर को ही दोपहर 12 बजे से 2 बजे के शुभ मुहूर्त में दोनों तिथियों का श्राद्ध संपन्न करने की सलाह दी है।

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