मूनक, 19 अप्रैल (दर्शन शर्मा): भगवान श्री विष्णु के छठे अवतार भगवान श्री परशुराम जयंती स्थानीय ब्राह्मण धर्मशाला में श्रद्धा एवं उत्साह के साथ धूमधाम से मनाई गई। इस अवसर पर भगवान परशुराम जी की विधिवत पूजा-अर्चना की गई तथा श्री सुंदरकांड का पाठ किया गया। पाठ के उपरांत पूर्णाहुति दी गई और अटूट भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। (मूनक स्थित ब्राह्मण धर्मशाला में श्री परशुराम जयंती के अवसर पर पूजा-अर्चना एवं भंडारे में शामिल श्रद्धालु) धार्मिक ग्रंथों के अनुसार भगवान परशुराम जी ने धरती पर अधर्म, अत्याचार और अन्याय का अंत कर धर्म की पुनर्स्थापना के लिए अवतार लिया था। यह दिन ज्ञान, शक्ति और न्याय का प्रतीक माना जाता है। भगवान परशुराम जी शस्त्र और शास्त्र दोनों के ज्ञाता थे। इस शुभ अवसर पर सर्वसम्मति से नई प्रबंधक कमेटी का गठन भी किया गया। इसमें राम कुमार शर्मा को प्रधान, संदीप शर्मा को उप-प्रधान, दर्शन शर्मा को चेयरमैन, कामराज शर्मा को उप-चेयरमैन, डॉ. लज्जा राम शर्मा, राकेश कुमार शर्मा (बंबू) और हरिंदर शर्मा को सरपरस्त नियुक्त किया गया। ...
मोहित गौतम (दिल्ली) : भारत जैसे विशाल लोकतंत्र में सरकारी मंत्रालयों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि यही संस्थाएं नीतियां बनाती हैं, योजनाएं लागू करती हैं और जनता तक सरकारी सेवाएं पहुंचाने का काम करती हैं। कागजों पर देखा जाए तो हर मंत्रालय का उद्देश्य स्पष्ट है, जनता के जीवन स्तर को बेहतर बनाना और देश के विकास को गति देना। लेकिन असली सवाल यह है कि क्या ये मंत्रालय वास्तव में जमीन पर उतना ही प्रभावी काम कर पा रहे हैं, जितना उनके दस्तावेजों में दिखाई देता है, या फिर यह व्यवस्था केवल कागजी कार्यवाही तक सीमित होकर रह गई है। पिछले कुछ वर्षों में सरकार ने कई महत्वाकांक्षी योजनाएं और नीतियां शुरू की हैं, जिनका उद्देश्य देश को आर्थिक, सामाजिक और तकनीकी रूप से मजबूत बनाना है। डिजिटल इंडिया, स्वास्थ्य योजनाएं, शिक्षा सुधार और बुनियादी ढांचे के विकास जैसे कई प्रयास मंत्रालयों के माध्यम से ही लागू किए जाते हैं। इन योजनाओं ने निश्चित रूप से कुछ सकारात्मक बदलाव भी लाए हैं, लेकिन कई बार इनकी वास्तविक सफलता कार्यान्वयन पर निर्भर करती है, जो हर स्तर पर समान रूप से प्रभावी नहीं दिखती। ...
मूनक, 30 अप्रैल (दर्शन शर्मा): पंजाब में खराब बिजली आपूर्ति तथा लंबे समय तक लगने वाली बिजली कटौती के विरोध में शिरोमणि अकाली दल की ओर से मूनक स्थित बिजली बोर्ड के सब-डिविजनल कार्यालय परिसर में प्रदर्शन किया गया। यह प्रदर्शन शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल के निर्देश पर हल्का लहरा के इंचार्ज एडवोकेट गगनदीप सिंह खंडेबाद की अगुवाई में आयोजित किया गया। इस अवसर पर अकाली दल के बीसी विंग के जिला अध्यक्ष निर्मल सिंह कडैल विशेष रूप से उपस्थित रहे। प्रदर्शन में अकाली दल के सैकड़ों कार्यकर्ताओं के साथ बड़ी संख्या में स्थानीय लोग भी शामिल हुए। प्रदर्शन को संबोधित करते हुए एडवोकेट गगनदीप सिंह खंडेबाद ने कहा कि भीषण गर्मी के दौरान पर्याप्त बिजली आपूर्ति न होने से गांवों और शहरों के लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी सरकार की नीतियों के कारण आम नागरिकों, दुकानदारों, वर्कशॉप संचालकों और उद्योगों का कामकाज प्रभावित हो रहा है। (मूनक स्थित बिजली बोर्ड कार्यालय परिसर में खराब बिजली आपूर्ति के विरोध में प्रदर्शन करते हल्का इंचार्ज एडव...
मूनक, 13 अप्रैल (दर्शन शर्मा): डी.ए.वी. सीनियर सेकेंडरी पब्लिक स्कूल, मूनक में बैसाखी पर्व के उपलक्ष्य में प्रधानाचार्य संजीव शर्मा के नेतृत्व में अध्यापकों एवं विद्यार्थियों द्वारा श्रद्धा भाव से सुखमनी साहिब का पाठ किया गया। विद्यालय के ऑडिटोरियम में श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का स्वरूप विधिवत स्थापित किया गया। इस अवसर पर श्रीमती रूपेंद्र कौर, श्रीमती मोहिनी शर्मा, श्रीमती नेहा मेहता, श्रीमती राजेंद्र कौर, श्रीमती वीरपाल कौर, श्रीमती अमरजोत कौर, कुमारी जश्नदीप कौर तथा कुमारी राजवीर कौर द्वारा सुखमनी साहिब का पाठ किया गया। इसके उपरांत अरदास की गई तथा भोग डाला गया। (डीएवी स्कूल मूनक में बैसाखी पर्व के अवसर पर सुखमनी साहिब का पाठ करते हुए विद्यार्थी एवं अध्यापक) कार्यक्रम के दौरान एलकेजी से लेकर दूसरी कक्षा तक के विद्यार्थियों के लिए बैसाखी से संबंधित प्रिंटिंग, पेंटिंग तथा आर्ट एंड क्राफ्ट गतिविधियां भी आयोजित की गईं, जिनमें बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रधानाचार्य संजीव शर्मा ने विद्यार्थियों को बैसाखी के इतिहास एवं आध्यात्मिक महत्व के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि यह प...
मोहित गौतम (दिल्ली) : चुनावों में मतदान समाप्त होने और मतगणना शुरू होने के साथ आमतौर पर यह माना जाता है कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया अपने अंतिम चरण में पहुंच रही है। लेकिन हाल के वर्षों में एक नई प्रवृत्ति सामने आई है, जहां असली राजनीतिक तनाव कई बार नतीजों के बाद शुरू होता दिखाई देता है। परिणामों को लेकर आरोप-प्रत्यारोप, सुरक्षा को लेकर सवाल और राजनीतिक कार्यकर्ताओं की सक्रियता अब चुनावी प्रक्रिया का नया संवेदनशील चरण बनते जा रहे हैं। मतगणना के दौरान या उसके बाद उठने वाले विवाद केवल चुनावी आंकड़ों तक सीमित नहीं रहते। कई बार यह बहस प्रशासनिक निष्पक्षता, चुनावी पारदर्शिता और संस्थाओं पर भरोसे तक पहुंच जाती है। यही वजह है कि परिणामों के बाद का समय केवल राजनीतिक दलों के लिए ही नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक संस्थाओं के लिए भी परीक्षा का दौर बन जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस स्थिति के पीछे कई कारण हैं। चुनावों में बढ़ती प्रतिस्पर्धा, सीमित वोट अंतर और राजनीतिक दांव ऊंचे होने के कारण हर सीट का महत्व बढ़ गया है। ऐसे में जब मुकाबला कड़ा होता है, तो मतगणना के हर चरण पर राजनीतिक नजर और संवेदन...