मोहित गौतम (दिल्ली) : भारतीय यात्रियों के लिए अंतरराष्ट्रीय यात्रा अब पहले से कहीं अधिक आसान होने जा रही है। जर्मनी सरकार ने 2026 से ट्रांज़िट वीजा से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव करने का फैसला किया है। नए नियमों के अनुसार अब भारतीय पासपोर्ट धारकों को जर्मनी के हवाई अड्डों से होकर किसी तीसरे देश की यात्रा करने पर अलग से ट्रांज़िट वीजा लेने की आवश्यकता नहीं होगी, बशर्ते यात्री एयरपोर्ट के अंतरराष्ट्रीय ट्रांज़िट क्षेत्र से बाहर न जाए।
अब तक स्थिति यह थी कि यदि कोई भारतीय यात्री फ्रैंकफर्ट, म्यूनिख या अन्य जर्मन एयरपोर्ट पर फ्लाइट बदलता था, तो उसे पहले से ट्रांज़िट वीजा लेना पड़ता था। इस प्रक्रिया में समय, खर्च और दस्तावेज़ी औपचारिकताएं जुड़ी होती थीं। नए नियम लागू होने के बाद यात्रियों को केवल अपनी आगे की टिकट और वैध पासपोर्ट के आधार पर कनेक्टिंग फ्लाइट पकड़ने की अनुमति मिलेगी।

हालांकि यह स्पष्ट किया गया है कि यह सुविधा केवल ट्रांज़िट तक सीमित है। यदि कोई यात्री जर्मनी में एयरपोर्ट से बाहर निकलना चाहता है, शहर में रुकना चाहता है या पर्यटन अथवा व्यापार उद्देश्य से प्रवेश करना चाहता है, तो उसे पहले की तरह उपयुक्त वीजा लेना अनिवार्य होगा। वीजा-मुक्त सुविधा केवल उसी स्थिति में लागू होगी जब यात्री अंतरराष्ट्रीय ट्रांज़िट क्षेत्र में ही रहेगा।
यात्रा विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से भारतीय यात्रियों की यात्रा लागत कम होगी और कनेक्टिंग फ्लाइट्स के विकल्प बढ़ेंगे। इससे यूरोप के रास्ते लंबी दूरी की उड़ानों की योजना बनाना भी अधिक सरल हो जाएगा। साथ ही यह कदम भारत के प्रति जर्मनी के भरोसे और आपसी सहयोग को भी दर्शाता है।
कुल मिलाकर जर्मनी का यह निर्णय 2026 में भारतीय यात्रियों के लिए एक सकारात्मक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। इससे न केवल यात्रा प्रक्रिया आसान होगी, बल्कि अंतरराष्ट्रीय हवाई सफर पहले से ज्यादा तेज़, सुविधाजनक और तनावमुक्त बन सकेगा।