UPI फ्रॉड: पैसा वापस मिलेगा या नहीं? जानिए पूरा कानूनी सच
मोहित गौतम (दिल्ली) : भारत तेजी से डिजिटल भुगतान की ओर बढ़ चुका है और UPI आम लोगों की रोजमर्रा की जरूरत बन गया है। इसके साथ ही UPI फ्रॉड के मामले भी तेजी से बढ़े हैं। फर्जी कॉल, नकली कस्टमर केयर, गलत लिंक और स्क्रीन शेयर जैसे तरीकों से ठग लोगों के खातों से पैसा निकाल रहे हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर UPI से पैसा ठग लिया जाए, तो क्या वह वापस मिल सकता है या नहीं।
कानूनी रूप से देखा जाए तो UPI फ्रॉड में पैसा वापस मिलने की संभावना कई बातों पर निर्भर करती है। यदि फ्रॉड की शिकायत तुरंत की जाती है और ट्रांजैक्शन अभी प्रोसेस में है, तो बैंक या पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर उस रकम को रोक सकता है। RBI के नियमों के अनुसार, ग्राहक को फ्रॉड की जानकारी मिलते ही तुरंत बैंक और साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज करनी चाहिए।

अगर ग्राहक ने गलती से खुद पैसा भेज दिया है, जैसे किसी ठग के झांसे में आकर UPI पिन बता दिया या ट्रांजैक्शन को स्वयं अप्रूव किया, तो ऐसे मामलों में पैसा वापस मिलना मुश्किल हो जाता है। हालांकि जांच के बाद अगर यह साबित हो जाए कि धोखाधड़ी हुई है और ग्राहक की लापरवाही नहीं थी, तो बैंक कुछ मामलों में राहत दे सकता है।
2026 में साइबर कानूनों को पहले की तुलना में ज्यादा मजबूत किया गया है। डिजिटल पेमेंट से जुड़े अपराधों के लिए विशेष साइबर सेल और फास्ट ट्रैक जांच प्रक्रिया लागू की गई है। राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल के माध्यम से शिकायत दर्ज करने पर मामला सीधे संबंधित बैंक और पुलिस तक पहुंचता है, जिससे कार्रवाई तेज होती है।
RBI और बैंक लगातार यह साफ कर रहे हैं कि किसी भी तरह का UPI पिन, OTP या लिंक किसी के साथ साझा न किया जाए। इसके बावजूद अगर कोई व्यक्ति फ्रॉड का शिकार होता है, तो घबराने की बजाय सही कानूनी प्रक्रिया अपनाना जरूरी है। शिकायत नंबर, बैंक संवाद और ट्रांजैक्शन डिटेल सुरक्षित रखना आगे की कार्रवाई में मदद करता है।
कुल मिलाकर 2026 में UPI फ्रॉड के मामलों में पैसा वापस मिलना संभव है, लेकिन यह पूरी तरह इस बात पर निर्भर करता है कि शिकायत कितनी जल्दी की गई और गलती किस स्तर पर हुई। जागरूकता, सतर्कता और समय पर शिकायत ही डिजिटल ठगी से बचाव का सबसे मजबूत हथियार है।