पीएम मोदी ने दिल्ली में मनाया पोंगल, तमिल संस्कृति और किसानों को दिया सम्मान
मोहित गौतम (दिल्ली) : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनवरी 2026 में नई दिल्ली में केंद्रीय मंत्री एल. मुरुगन के आवास पर आयोजित पोंगल समारोह में भाग लिया। इस अवसर पर उन्होंने तमिल समुदाय के लोगों को पोंगल की शुभकामनाएं दीं और पारंपरिक रीति रिवाजों में शामिल होकर भारतीय संस्कृति की विविधता का संदेश दिया। कार्यक्रम में कृषि से जुड़े प्रतीक, पारंपरिक भोजन और सांस्कृतिक वातावरण देखने को मिला, जिसने इस उत्सव को विशेष बना दिया।
पोंगल दक्षिण भारत का प्रमुख फसल पर्व है, जो सूर्य, प्रकृति और किसानों के प्रति आभार व्यक्त करने का प्रतीक माना जाता है। प्रधानमंत्री मोदी ने इस अवसर पर कहा कि पोंगल केवल तमिलनाडु तक सीमित त्योहार नहीं है, बल्कि यह पूरे भारत की कृषि परंपरा और सांस्कृतिक चेतना का प्रतिनिधित्व करता है। उन्होंने किसानों की मेहनत को राष्ट्र की प्रगति की नींव बताते हुए कहा कि देश की आत्मा गांवों और खेतों में बसती है।

समारोह के दौरान प्रधानमंत्री ने पारंपरिक अनुष्ठानों में भाग लिया और उपस्थित लोगों से संवाद किया। उन्होंने भारत के विभिन्न हिस्सों में मनाए जाने वाले फसल पर्वों जैसे मकर संक्रांति, भोगाली बिहू और उत्तरायण का भी उल्लेख किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि ये सभी पर्व देश की सांस्कृतिक एकता को मजबूत करते हैं और यह दिखाते हैं कि भौगोलिक विविधता के बावजूद भारत एक साझा भावना से जुड़ा हुआ है।
प्रधानमंत्री मोदी ने इस अवसर पर भारतीय संस्कृति की वैश्विक पहचान पर भी बात की। उन्होंने कहा कि आज भारतीय त्योहार दुनिया के कई देशों में उत्साह के साथ मनाए जाते हैं, जो भारत की सांस्कृतिक शक्ति और सौम्य प्रभाव को दर्शाता है। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे अपनी परंपराओं को समझें, उन्हें अपनाएं और आने वाली पीढ़ियों तक आगे बढ़ाएं।
इस कार्यक्रम में तमिल समुदाय के कई गणमान्य लोग और सामाजिक प्रतिनिधि भी मौजूद थे। आयोजन का उद्देश्य केवल एक त्योहार मनाना नहीं था, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विरासत, सामाजिक समरसता और कृषि आधारित जीवन मूल्यों को उजागर करना भी था। कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश भी दिया गया कि विविध भाषाओं, परंपराओं और त्योहारों के बावजूद भारत एक सूत्र में बंधा हुआ है।
कुल मिलाकर प्रधानमंत्री का यह कार्यक्रम सांस्कृतिक सम्मान, किसान गौरव और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक बनकर सामने आया। पोंगल जैसे पर्व न केवल हमारी परंपराओं को जीवित रखते हैं, बल्कि समाज में सकारात्मक ऊर्जा और आपसी जुड़ाव को भी मजबूत करते हैं। प्रधानमंत्री की उपस्थिति ने इस उत्सव को राष्ट्रीय स्तर पर एक विशेष पहचान दिलाई।