Welcome to Khabar.com.IN – Delivering Truth, Facts, and Public Interest Journalism.

Polymer Currency Notes: भारत में अगले साल आएंगे प्लास्टिक के नोट, जानिए क्या बदलेगा और क्या नहीं

मोहित गौतम (दिल्ली) : भारत में करेंसी नोटों को लेकर एक बड़ा बदलाव आने की तैयारी है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया यानी RBI की मॉनिटरी पॉलिसी कमेटी की बैठक के बाद गवर्नर संजय मल्होत्रा ने पॉलीमर बैंकनोट्स को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी दी है। प्रस्तावित योजना के अनुसार, शुरुआत में कम मूल्य वाले पॉलीमर नोट जारी किए जा सकते हैं। ऐसे नोटों का इस्तेमाल आम लोगों के बीच अधिक होता है और कागजी नोटों की तुलना में इनके ज्यादा समय तक चलने की उम्मीद की जाती है।

पॉलीमर नोट को आम भाषा में प्लास्टिक का नोट कहा जाता है, लेकिन यह सामान्य प्लास्टिक से बना हुआ नोट नहीं होता। इसे एक विशेष पॉलीमर सब्सट्रेट पर तैयार किया जाता है। इसकी बनावट कागजी नोट से अलग होती है और इसमें ऐसे सुरक्षा फीचर्स लगाए जा सकते हैं, जिन्हें नकली बनाना अधिक कठिन होता है।

भारत में पॉलीमर नोट लाने के पीछे सबसे बड़ा कारण छोटे मूल्य के कागजी नोटों की कम उम्र बताई जा रही है। 10, 20 और 50 रुपये जैसे नोट रोजमर्रा के लेनदेन में बड़ी संख्या में इस्तेमाल होते हैं। बार बार हाथ बदलने, नमी, धूल और अन्य परिस्थितियों के कारण ये नोट जल्दी गंदे या खराब हो सकते हैं। पॉलीमर नोटों से इस समस्या को कम करने की उम्मीद है।

पॉलीमर नोटों की सबसे बड़ी खासियत उनकी टिकाऊ क्षमता मानी जाती है। ये पानी और नमी के प्रति कागजी नोटों की तुलना में अधिक प्रतिरोधी होते हैं। इन्हें आसानी से फाड़ना भी मुश्किल होता है। इसका मतलब यह है कि एक पॉलीमर नोट लंबे समय तक इस्तेमाल में रह सकता है और उसे बार बार बदलने की जरूरत कम पड़ सकती है।

इस बदलाव का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू नकली नोटों से जुड़ी सुरक्षा है। पॉलीमर बैंकनोट्स में पारदर्शी विंडो और अन्य आधुनिक सुरक्षा तकनीकों का इस्तेमाल किया जा सकता है। ऐसे फीचर्स आम लोगों को असली और नकली नोट की पहचान करने में मदद कर सकते हैं। हालांकि किसी भी करेंसी को पूरी तरह नकली बनाना असंभव कर देने का दावा करना सही नहीं होगा। सुरक्षा तकनीक नकली नोटों को बनाना और चलाना कठिन बनाने में मदद करती है।

पॉलीमर नोटों के इस्तेमाल से लंबे समय में नोटों की छपाई और उन्हें बदलने की लागत पर भी असर पड़ सकता है। यदि कोई नोट अधिक समय तक चल जाता है, तो पुराने और खराब नोटों को बार बार बदलने की जरूरत कम होती है। इससे केंद्रीय बैंक को करेंसी मैनेजमेंट से जुड़े खर्चों में बचत हो सकती है।

हालांकि पॉलीमर नोट आने का मतलब यह नहीं है कि भारत के मौजूदा कागजी नोट अचानक बंद हो जाएंगे। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पॉलीमर और कागजी नोट कुछ समय तक साथ साथ चल सकते हैं। यानी यह बदलाव चरणबद्ध तरीके से किया जा सकता है। आम लोगों को अपने पास मौजूद कागजी नोटों को तुरंत बदलने या बैंक में जमा करने की जरूरत नहीं होगी, जब तक RBI या सरकार की ओर से ऐसा कोई अलग निर्देश जारी न किया जाए।

भारत में पॉलीमर करेंसी को लेकर चर्चा नई नहीं है। इससे पहले भी देश में नोटों की उम्र बढ़ाने के लिए पॉलीमर आधारित करेंसी पर विचार किया जा चुका है। हालांकि अलग अलग समय पर तकनीकी, लागत और अन्य कारणों से इसे आगे बढ़ाने में चुनौतियां रही हैं। अब RBI की ओर से इस दिशा में फिर से जानकारी सामने आने के बाद पॉलीमर नोटों को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

दुनिया के कई देशों में पॉलीमर बैंकनोट्स का इस्तेमाल पहले से हो रहा है। ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, ब्रिटेन और न्यूजीलैंड जैसे देशों ने अलग अलग मूल्यवर्ग में पॉलीमर करेंसी को अपनाया है। इन देशों के अनुभव से भारत को भी इस तकनीक के फायदे और चुनौतियों को समझने में मदद मिल सकती है।

यहां यह समझना भी जरूरी है कि पॉलीमर नोट आने को नोटबंदी से जोड़ना सही नहीं होगा। नोटबंदी में किसी विशेष मूल्यवर्ग के पुराने नोट को कानूनी रूप से अमान्य घोषित किया जाता है, जबकि पॉलीमर करेंसी की शुरुआत का उद्देश्य मुख्य रूप से नोटों की गुणवत्ता, टिकाऊपन और सुरक्षा में सुधार करना है।

भारत में अतीत में बड़े मूल्य के नोटों को वापस लेने के फैसले कई बार लिए गए हैं। 1946 में तत्कालीन ब्रिटिश सरकार ने 500, 1,000 और 10,000 रुपये के नोटों को बंद किया था। इसके बाद 1978 में 1,000, 5,000 और 10,000 रुपये के नोटों को वापस लिया गया। 2016 में नरेंद्र मोदी सरकार ने 500 और 1,000 रुपये के पुराने नोटों को कानूनी रूप से अमान्य घोषित किया और नए 500 रुपये के नोट के साथ 2,000 रुपये का नोट जारी किया।

मई 2023 में RBI ने 2,000 रुपये के नोट को चलन से वापस लेने की घोषणा की थी। यह फैसला 2016 जैसी नोटबंदी नहीं था, क्योंकि 2,000 रुपये के नोट को बदलने और बैंक खातों में जमा करने के लिए समय दिया गया था। RBI ने इसे क्लीन नोट पॉलिसी के तहत लिया गया फैसला बताया था।

पॉलीमर नोटों की शुरुआत इसलिए इन पुराने नोट बदलावों से अलग है। इसका मुख्य फोकस करेंसी के मटेरियल और उपयोग की अवधि पर है। अगर नए नोट लंबे समय तक चलते हैं, तो इससे नकदी प्रबंधन में भी बदलाव आ सकता है।

आम लोगों के लिए फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पॉलीमर नोट आने का मतलब यह नहीं है कि उनके पास मौजूद कागजी नोट बेकार हो जाएंगे। नए नोट जारी होने की स्थिति में RBI द्वारा अलग से स्पष्ट निर्देश दिए जाएंगे। जब तक किसी पुराने नोट को वापस लेने की आधिकारिक घोषणा नहीं होती, तब तक उसके चलन से संबंधित नियम लागू रहेंगे।

भारत जैसे बड़े देश में करेंसी का कोई भी बदलाव धीरे धीरे लागू करना जरूरी होता है। बड़ी आबादी, विशाल नकदी अर्थव्यवस्था और अलग अलग क्षेत्रों में डिजिटल भुगतान की अलग पहुंच को देखते हुए पॉलीमर करेंसी की शुरुआत एक चरणबद्ध प्रक्रिया हो सकती है।

आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि RBI किन मूल्यवर्ग के पॉलीमर नोट पहले जारी करता है, उनकी सुरक्षा विशेषताएं क्या होंगी और बाजार में कागजी तथा पॉलीमर नोट कितने समय तक एक साथ चलते हैं। फिलहाल पॉलीमर करेंसी का संभावित आगमन भारतीय बैंकिंग और नकदी व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण बदलाव की शुरुआत माना जा सकता है।

Khabar.com.IN

बदलती दुनिया को समझने के लिए सिर्फ खबरें पढ़ना काफी नहीं, उनके पीछे छिपे सवालों को समझना भी जरूरी है। Khabar.com.IN आपके सामने ऐसे ही महत्वपूर्ण मुद्दों पर स्वतंत्र विचार और विश्लेषण प्रस्तुत करता है।

Popular posts from this blog

CJP Protest: सरकार से बातचीत के बाद भी आंदोलन जारी, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर फैसला बाकी

Delhi Laxmi Yojana: पात्र महिलाओं को हर महीने मिलेंगे 2,500 रुपये, जानें पात्रता और जरूरी शर्तें

मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड पहुंचे पीएम मोदी, भारत और ऑस्ट्रेलिया के खेल संबंधों को मिली नई मजबूती

South India Rain: केरल में बारिश से 8 मौतें, हजारों लोग राहत शिविरों में, कर्नाटक में भूस्खलन से परिवार के 3 लोगों की जान गई

तरुण तेजपाल को 10 साल की जेल: 2013 यौन उत्पीड़न मामले में हाई कोर्ट का बड़ा फैसला