Parliament Monsoon Session 2026: अमित शाह की मौजूदगी की मांग पर विपक्ष का हंगामा, दोनों सदन 10 अगस्त तक स्थगित
मोहित गौतम (दिल्ली) : संसद के मानसून सत्र में शुक्रवार 7 अगस्त को एक बार फिर विपक्ष के विरोध प्रदर्शन के कारण कार्यवाही प्रभावित हुई। गृह मंत्री अमित शाह की सदन में मौजूदगी और उनके बयान की मांग को लेकर विपक्षी सांसदों ने जोरदार नारेबाजी की। लगातार हंगामे के बीच लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही आगे नहीं चल सकी और दोनों सदनों को 10 अगस्त तक के लिए स्थगित कर दिया गया।
राज्यसभा की कार्यवाही सुबह 11 बजे शुरू होते ही विपक्षी सांसदों ने अपनी मांग को लेकर नारेबाजी शुरू कर दी। कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्षी सांसद गृह मंत्री अमित शाह की सदन में मौजूदगी की मांग कर रहे थे। विपक्ष का कहना था कि जिस मुद्दे को लेकर वे सरकार से जवाब चाहते हैं, उस पर गृह मंत्री को सदन में आकर अपना पक्ष रखना चाहिए।
विपक्षी सांसदों की नारेबाजी के जवाब में सत्ता पक्ष के सांसदों की ओर से भी विरोध किया गया। दोनों पक्षों के बीच लगातार नारेबाजी और शोरगुल के कारण सदन की सामान्य कार्यवाही प्रभावित हुई। सभापति की ओर से सदन को व्यवस्थित तरीके से चलाने की अपील के बावजूद हंगामा जारी रहा।
राज्यसभा के बाद लोकसभा में भी इसी तरह का माहौल देखने को मिला। विपक्षी सांसदों ने अपनी मांगों को लेकर विरोध जताया और सरकार से संबंधित मुद्दे पर जवाब देने की मांग की। हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही को आगे बढ़ाना मुश्किल हो गया।
संसद में विपक्ष की ओर से किसी केंद्रीय मंत्री के बयान की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन कोई असामान्य स्थिति नहीं है। विपक्ष अक्सर महत्वपूर्ण राजनीतिक या राष्ट्रीय मुद्दों पर सरकार से विस्तृत जवाब की मांग करता है। वहीं सरकार की ओर से यह तर्क दिया जाता है कि संसद की कार्यवाही नियमों और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार चलनी चाहिए।
शुक्रवार की कार्यवाही में भी दोनों पक्षों के बीच इसी तरह का टकराव देखने को मिला। विपक्षी सांसदों का कहना था कि गृह मंत्री को सदन में उपस्थित होकर संबंधित मुद्दे पर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। दूसरी ओर सत्ता पक्ष के सांसदों ने विपक्षी नारेबाजी का विरोध किया।
लगातार हंगामे के कारण दोनों सदनों की कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित कर दी गई। अब संसद की अगली कार्यवाही 10 अगस्त को होने की संभावना है। इसके साथ ही यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अगले कार्यदिवस पर सरकार और विपक्ष के बीच इस मुद्दे को लेकर कोई सहमति बनती है या नहीं।
संसद की कार्यवाही का लगातार बाधित होना विधायी कामकाज के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। मानसून सत्र में कई महत्वपूर्ण विधेयकों, सरकारी नीतियों और राष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा होनी होती है। ऐसे में बार बार होने वाले व्यवधान के कारण निर्धारित कामकाज प्रभावित हो सकता है।
विपक्ष का कहना है कि संसद जनता से जुड़े महत्वपूर्ण सवालों पर सरकार से जवाब मांगने का सबसे प्रमुख मंच है। वहीं सरकार की ओर से यह अपेक्षा रहती है कि विपक्ष अपनी मांगों को संसदीय नियमों के तहत उठाए और सदन की कार्यवाही को सुचारू रूप से चलने दे।
7 अगस्त की कार्यवाही के बाद अब संसद में अगले चरण की राजनीतिक गतिविधियों पर नजर रहेगी। यदि विपक्ष अपनी मांग पर कायम रहता है, तो अगले कार्यदिवस में भी विरोध प्रदर्शन जारी रहने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। वहीं सरकार की ओर से इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाया जाता है, यह भी महत्वपूर्ण होगा।
फिलहाल शुक्रवार की कार्यवाही का सबसे बड़ा घटनाक्रम यही रहा कि अमित शाह की मौजूदगी और बयान की मांग को लेकर विपक्ष के विरोध के बीच संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही 10 अगस्त तक स्थगित कर दी गई।
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