Supreme Court on KENT Fans: Kent RO को बड़ा झटका, KENT नाम से पंखे बेचने पर रोक बरकरार
मोहित गौतम (दिल्ली) : सुप्रीम कोर्ट ने KENT नाम से पंखों की बिक्री को लेकर चल रहे ट्रेडमार्क विवाद में Kent RO Systems Limited को तत्काल राहत देने से इनकार कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट के उस अंतरिम आदेश में हस्तक्षेप करने से मना कर दिया, जिसके तहत Kent RO को KENT ट्रेडमार्क के तहत पंखों का निर्माण और बिक्री करने से रोका गया था। अदालत ने कहा कि हाई कोर्ट के अंतरिम आदेश में ऐसी कोई कानूनी गलती नहीं दिखाई देती, जिसके आधार पर सुप्रीम कोर्ट को उसमें हस्तक्षेप करना चाहिए।
जस्टिस जेबी पार्डीवाला और जस्टिस विनोद चंद्रन की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि Kent RO और Kent Cables के बीच हाई कोर्ट में लंबित मुख्य मुकदमों की सुनवाई जल्द से जल्द की जाए। अदालत का मानना है कि मामले के अंतिम समाधान के लिए मुख्य विवाद की सुनवाई में अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए।
यह विवाद KENT नाम के इस्तेमाल को लेकर है। Kent Cables का दावा है कि उसने 1984 में इंसुलेटेड वायर, केबल और इलेक्ट्रिकल कंपोनेंट्स के लिए KENT ट्रेडमार्क अपनाया था और 1986 में इसके लिए ट्रेडमार्क पंजीकरण प्राप्त किया था। कंपनी का कहना है कि बाद में उसने अपने कारोबार का विस्तार इलेक्ट्रिकल उपकरणों तक किया और लगभग 2009 से KENT नाम के तहत पंखे भी बेचने शुरू किए।
दूसरी ओर Kent RO Systems ने दावा किया कि उसने KENT नाम का इस्तेमाल 1988 में ऑयल मीटर के कारोबार के लिए शुरू किया था। इसके बाद कंपनी ने वाटर प्यूरिफायर, एयर प्यूरिफायर और घरेलू उपकरणों सहित कई उत्पादों के क्षेत्र में अपना कारोबार बढ़ाया। Kent RO ने अपने ब्रांड की पहचान और बाजार में बनी प्रतिष्ठा का हवाला देते हुए KENT नाम पर अपने अधिकार का पक्ष रखा।
मामला तब और महत्वपूर्ण हो गया जब दोनों कंपनियां पंखों के कारोबार में KENT नाम के इस्तेमाल को लेकर आमने सामने आ गईं। Kent Cables ने अदालत के सामने ऐसे दस्तावेज पेश किए थे, जिनसे पंखों के लिए KENT नाम के इस्तेमाल का दावा किया गया था। इनमें बिक्री चालान, सरकारी मंजूरियां, प्रमाणपत्र और विज्ञापन जैसे दस्तावेज शामिल थे।
दिल्ली हाई कोर्ट ने अंतरिम स्तर पर उपलब्ध सामग्री को देखते हुए माना था कि Kent Cables कम से कम 2009 से KENT नाम के तहत पंखों का कारोबार करने का प्रथम दृष्टया प्रमाण पेश करने में सफल रही है। हाई कोर्ट ने यह भी माना कि पंखों का कारोबार Kent Cables के पहले से चल रहे वायर और केबल कारोबार से पूरी तरह अलग नहीं माना जा सकता, बल्कि इलेक्ट्रिकल उत्पादों के क्षेत्र में यह एक स्वाभाविक विस्तार हो सकता है।
हाई कोर्ट ने एक और महत्वपूर्ण तथ्य पर ध्यान दिया था। रिकॉर्ड के अनुसार Kent RO ने 2007 में पंखों के लिए KENT नाम के ट्रेडमार्क आवेदन का विरोध किया था और 2011 में Kent Cables को Cease and Desist नोटिस भी भेजा था। इसके बावजूद Kent RO ने इस विवाद को लेकर अपना मुकदमा 2022 में दायर किया।
इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए हाई कोर्ट ने अंतरिम स्तर पर Kent Cables को पंखों के लिए KENT नाम का पूर्व उपयोगकर्ता माना था और Kent RO को इस नाम से पंखे बनाने या बेचने से रोक दिया था। Kent RO ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान भी पीठ ने Kent RO के पंखों के कारोबार में प्रवेश करने के समय को लेकर सवाल उठाए। अदालत ने इस बात पर ध्यान दिया कि यदि Kent Cables लंबे समय से KENT नाम के तहत पंखे बेच रही थी, तो बाद में उसी नाम से पंखों के कारोबार में प्रवेश करने का प्रयास विवाद का कारण बन सकता है।
Kent RO की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने दलील दी कि KENT एक प्रसिद्ध ट्रेडमार्क है और कंपनी के पास अलग अलग उत्पादों के लिए व्यापक ट्रेडमार्क अधिकार हैं। उन्होंने हाई कोर्ट के इस निष्कर्ष को भी चुनौती दी कि Kent RO के पास पंखों के लिए ट्रेडमार्क पंजीकरण नहीं था।
Kent RO की ओर से यह तर्क भी रखा गया कि ट्रेडमार्क कानून के तहत किसी कंपनी के लिए अपने प्रत्येक अलग उत्पाद के लिए अलग ट्रेडमार्क पंजीकरण हासिल करना हमेशा आवश्यक नहीं होता। कंपनी ने अपने पुराने ब्रांड इस्तेमाल और उससे जुड़ी प्रतिष्ठा को भी अपने पक्ष में महत्वपूर्ण आधार बताया।
हालांकि सुप्रीम कोर्ट इन दलीलों के आधार पर अंतरिम रोक हटाने के लिए तैयार नहीं हुआ। अदालत ने माना कि हाई कोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने का पर्याप्त आधार नहीं है। इसका अर्थ यह है कि फिलहाल Kent RO को KENT नाम के तहत पंखों के निर्माण और बिक्री से जुड़ी रोक का पालन करना होगा।
यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश अंतिम ट्रेडमार्क अधिकारों का फैसला नहीं है। अदालत ने मुख्य मुकदमों की जल्द सुनवाई का निर्देश दिया है। इसलिए KENT नाम पर दोनों कंपनियों के अंतिम अधिकार और विवाद का व्यापक कानूनी समाधान मुख्य मामलों की सुनवाई के बाद ही स्पष्ट होगा।
यह मामला ट्रेडमार्क कानून में Prior User यानी पहले इस्तेमाल करने वाले पक्ष के महत्व को भी सामने लाता है। किसी ब्रांड के विवाद में केवल ट्रेडमार्क पंजीकरण ही एकमात्र तथ्य नहीं होता। किसी खास उत्पाद के लिए ट्रेडमार्क का वास्तविक और लंबे समय से किया जा रहा इस्तेमाल भी अदालत के सामने महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
KENT विवाद इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि दोनों कंपनियां अलग अलग क्षेत्रों में KENT नाम के इस्तेमाल को लेकर अपने पुराने कारोबारी इतिहास का हवाला दे रही हैं। अंतिम फैसला इस बात पर निर्भर करेगा कि संबंधित उत्पादों और कारोबार के लिए ट्रेडमार्क अधिकारों का कानूनी दायरा क्या है और दोनों पक्ष अपने दावों को किस तरह साबित करते हैं।
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद दिल्ली हाई कोर्ट की अंतरिम रोक प्रभावी रहेगी। दोनों कंपनियों के बीच चल रहे मुख्य मुकदमों की जल्द सुनवाई के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि पंखों के कारोबार में KENT नाम के इस्तेमाल का अंतिम अधिकार किस पक्ष को मिलता है।
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