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इजरायली चुनाव के बाद सरकार गठन पर मंडराया गतिरोध: अरब-यहूदी राजनीतिक गठबंधन और नई चुनौतियों पर गहराया सियासी संकट

इजरायल में हाल ही में संपन्न हुए राष्ट्रीय चुनावों के बाद देश की राजनीतिक स्थिति में एक बार फिर बड़ा गतिरोध उत्पन्न हो गया है। प्रारंभिक परिणामों के अनुसार, प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का दक्षिणपंथी और धार्मिक दलों का गठबंधन बहुमत के जादुई आंकड़े से पीछे रह गया है, जिसके चलते देश में नई सरकार के गठन को लेकर पेचीदा चुनौतियां खड़ी हो गई हैं।

120 सीटों वाली नेसेट (संसद) में किसी भी प्रमुख राजनीतिक गुट को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलने के कारण, अरब-नेतृत्व वाले दलों की भूमिका सबसे अहम मानी जा रही है। चुनाव में अरब दलों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल 19 सीटें हासिल की हैं। विपक्षी खेमे (गैड आइजेनकोट के नेतृत्व वाले गठबंधन) के पास भी अपने दम पर बहुमत का आंकड़ा नहीं है, जिसके कारण यदि विपक्ष को सत्ता में आना है, तो उसे अरब दलों के समर्थन पर निर्भर रहना पड़ सकता है या बाहर से उनके समर्थन की संभावना तलाशनी होगी।

हालांकि, इजरायली राजनीति में यह एक बेहद संवेदनशील और विवादास्पद मुद्दा बना हुआ है, क्योंकि कई यहूदी विपक्षी नेता भी खुलकर अरब पार्टियों के साथ सीधे गठबंधन करने से हिचकिचाते रहे हैं। इसके विपरीत, प्रधानमंत्री नेतन्याहू के धड़े ने अरब दलों के साथ किसी भी प्रकार की साझेदारी से साफ इनकार किया है। सेना में अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स यहूदियों की अनिवार्य भर्ती, क्षेत्रीय सुरक्षा, और गाजा संघर्ष जैसे गंभीर मुद्दों के बीच यह राजनीतिक अनिश्चितता आने वाले दिनों में इजरायल की घरेलू और विदेश नीति पर गहरा असर डालने वाली है।