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Air India Flight Turbulence: एक पायलट के डोप टेस्ट पर उठे सवाल, DGCA कर रही मामले की जांच

मोहित गौतम (दिल्ली) : फुकेट से दिल्ली आ रही एयर इंडिया की एक फ्लाइट में हुई तेज टर्बुलेंस की घटना के बाद विमान के दोनों पायलटों के ड्रग स्क्रीनिंग टेस्ट को लेकर मामला सामने आया है। रिपोर्टों में सूत्रों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि पोस्ट फ्लाइट टेस्ट में एक पायलट की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। हालांकि एयर इंडिया ने इस रिपोर्ट की पुष्टि नहीं की है और कहा है कि उसे अभी तक टेस्ट रिपोर्ट उपलब्ध नहीं कराई गई है। मामले की जांच नागरिक उड्डयन महानिदेशालय यानी DGCA द्वारा की जा रही है।

यह घटना 4 अगस्त को फुकेट से दिल्ली आ रही एयर इंडिया की फ्लाइट AI2379 में हुई थी। उड़ान के दौरान विमान को तेज टर्बुलेंस का सामना करना पड़ा था। उपलब्ध जानकारी के अनुसार विमान की ऊंचाई में अचानक बदलाव आया और विमान कुछ समय के लिए करीब 300 फीट नीचे चला गया। इस दौरान विमान में सवार यात्रियों के बीच अफरा तफरी की स्थिति बन गई थी।

बताया गया है कि विमान में 137 यात्री और 8 क्रू सदस्य मौजूद थे। टर्बुलेंस के दौरान कई यात्रियों को चोटें आई थीं। घटना के बाद घायल यात्रियों को आवश्यक चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई गई। नागरिक उड्डयन मंत्री के. राममोहन नायडू ने भी घटना के संबंध में बताया था कि टर्बुलेंस लगभग पांच मिनट तक रहा।

घटना के बाद विमान के दोनों पायलटों का पोस्ट फ्लाइट ड्रग स्क्रीनिंग टेस्ट कराया गया। मीडिया रिपोर्टों में सूत्रों के हवाले से दावा किया गया कि इनमें से एक पायलट का टेस्ट पॉजिटिव आया है। रिपोर्ट के अनुसार, जांच पूरी होने तक दोनों पायलटों को ड्यूटी से हटाया गया है। हालांकि इस दावे की आधिकारिक पुष्टि अभी एयरलाइन की ओर से नहीं की गई है।

एयर इंडिया ने मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि उड़ान के बाद निर्धारित प्रोटोकॉल के तहत पायलटों का ड्रग स्क्रीनिंग टेस्ट कराया गया था। लेकिन संबंधित टेस्ट की रिपोर्ट अभी एयरलाइन के साथ साझा नहीं की गई है। इसलिए एयरलाइन ने किसी पायलट की रिपोर्ट पॉजिटिव होने की पुष्टि या खंडन करने से इनकार किया है।

एयरलाइन के अनुसार, नागरिक विमानन नियमों के तहत उसके क्रू सदस्यों का नियमित ड्रग टेस्ट किया जाता है। ऐसे परीक्षण केवल किसी विशेष उड़ान या दुर्घटना के बाद ही नहीं, बल्कि निर्धारित नियामकीय प्रक्रिया के तहत भी किए जाते हैं। इसलिए इस मामले में अंतिम निष्कर्ष आधिकारिक जांच और संबंधित रिपोर्ट सामने आने के बाद ही निकाला जा सकता है।

DGCA इस पूरी घटना की जांच कर रहा है। जांच में टर्बुलेंस के दौरान विमान की स्थिति, ऊंचाई में बदलाव, चालक दल की कार्रवाई और घटना के बाद अपनाए गए सुरक्षा प्रोटोकॉल सहित कई पहलुओं को देखा जा सकता है। पायलटों की मेडिकल और ड्रग स्क्रीनिंग से जुड़ी जानकारी भी जांच का हिस्सा हो सकती है।

विमान में अचानक आने वाला टर्बुलेंस यात्रियों के लिए जोखिम पैदा कर सकता है, खासकर तब जब वे सीट बेल्ट नहीं लगाए होते हैं। तेज झटकों के दौरान यात्री अपनी सीट से उछल सकते हैं या केबिन के अंदर किसी वस्तु से टकरा सकते हैं। यही वजह है कि उड़ान के दौरान सीट बेल्ट बांधे रखने की सलाह दी जाती है, खासकर जब विमान ऊंचाई पर हो।

इस घटना ने विमानन सुरक्षा को लेकर एक बार फिर कई सवाल खड़े किए हैं। हालांकि टर्बुलेंस अपने आप में असामान्य विमानन घटना नहीं है और आधुनिक विमान ऐसी परिस्थितियों से निपटने के लिए डिजाइन किए जाते हैं, लेकिन जब टर्बुलेंस बेहद तेज हो तो यात्रियों और क्रू सदस्यों की सुरक्षा चुनौती बन सकती है।

पायलट के कथित डोप टेस्ट को लेकर सामने आई जानकारी को लेकर भी सावधानी बरतना जरूरी है। जब तक संबंधित रिपोर्ट आधिकारिक तौर पर जारी नहीं होती और नियामकीय जांच पूरी नहीं होती, तब तक किसी व्यक्ति को दोषी मानना उचित नहीं होगा। मीडिया रिपोर्ट में सामने आए दावे और आधिकारिक रूप से प्रमाणित तथ्य अलग हो सकते हैं।

एयर इंडिया की ओर से रिपोर्ट उपलब्ध न होने की बात कहे जाने के बाद अब जांच के अगले चरण पर नजर रहेगी। यदि संबंधित टेस्ट रिपोर्ट आधिकारिक तौर पर DGCA या अन्य सक्षम प्राधिकरण के सामने आती है, तो उसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय हो सकती है।

फिलहाल इतना स्पष्ट है कि 4 अगस्त की फुकेट-दिल्ली उड़ान में गंभीर टर्बुलेंस की घटना हुई थी, जिसमें यात्रियों के घायल होने की जानकारी सामने आई थी। इसके बाद पायलटों की ड्रग स्क्रीनिंग कराई गई और अब एक पायलट की कथित पॉजिटिव रिपोर्ट को लेकर सवाल उठ रहे हैं। मामले की वास्तविक स्थिति DGCA की जांच और आधिकारिक रिपोर्ट आने के बाद ही पूरी तरह स्पष्ट होगी।

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