मोहित गौतम (दिल्ली) : दिल्ली में स्वच्छता और बेहतर कचरा प्रबंधन को लेकर नगर निगम की ओर से जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इसी अभियान के तहत दक्षिण पूर्व जोन और सेंट्रल जोन की IEC टीम ने तैमूर नगर स्थित कॉसमॉस पब्लिक स्कूल में ‘स्वच्छता की पाठशाला’ का आयोजन किया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को साफ सफाई, कचरे के सही प्रबंधन और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार व्यवहार के बारे में जागरूक करना रहा।
नगर निगम के अनुसार यह गतिविधि ‘दिल्ली को कूड़े से आजादी’ अभियान का हिस्सा है। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को बताया गया कि स्वच्छ शहर बनाने की जिम्मेदारी केवल नगर निगम या सफाई कर्मचारियों की नहीं है, बल्कि आम नागरिकों और खासकर बच्चों की भागीदारी भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
स्कूल में आयोजित जागरूकता कार्यक्रम के दौरान छात्रों को कचरे को अलग अलग श्रेणियों में रखने के महत्व के बारे में समझाया गया। घर और स्कूल में गीले तथा सूखे कचरे को अलग रखने की आदत से कचरे के निपटारे और पुनर्चक्रण की प्रक्रिया को बेहतर बनाया जा सकता है। छात्रों को बताया गया कि कचरे को एक ही जगह मिलाकर फेंकने के बजाय शुरुआत से ही उसका सही तरीके से वर्गीकरण करना जरूरी है।
कार्यक्रम में सिंगल यूज प्लास्टिक और प्लास्टिक कचरे को कम करने पर भी जोर दिया गया। विद्यार्थियों को रोजमर्रा की जिंदगी में प्लास्टिक के इस्तेमाल को कम करने और दोबारा इस्तेमाल किए जा सकने वाले विकल्पों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया। इस तरह की आदतें लंबे समय में पर्यावरण पर पड़ने वाले कचरे के दबाव को कम करने में मदद कर सकती हैं।
खुले स्थानों पर कचरा फेंकने की समस्या को लेकर भी विद्यार्थियों को जागरूक किया गया। खुले में कचरा डालने से आसपास का वातावरण गंदा होने के साथ साथ दुर्गंध, जलभराव और विभिन्न प्रकार की स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए नागरिकों को निर्धारित स्थान पर ही कचरा डालने और सार्वजनिक जगहों को साफ रखने की जिम्मेदारी निभाने की जरूरत है।
कार्यक्रम के दौरान मच्छरों और अन्य कीटों से फैलने वाली बीमारियों के बारे में भी छात्रों को जानकारी दी गई। आसपास पानी जमा होने और गंदगी रहने से ऐसे रोगों का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए घर, स्कूल और आसपास के सार्वजनिक क्षेत्रों में सफाई बनाए रखना जरूरी है।
नगर निगम की टीम ने विद्यार्थियों को केवल जानकारी देने तक कार्यक्रम को सीमित नहीं रखा, बल्कि उन्हें स्वच्छता से जुड़े व्यवहार को अपनी दैनिक जिंदगी का हिस्सा बनाने के लिए प्रेरित किया। छात्रों को स्वच्छता प्रतिज्ञा भी दिलाई गई, जिससे वे अपने आसपास साफ सफाई बनाए रखने और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करने में सक्रिय भूमिका निभा सकें।
स्कूलों में इस तरह के जागरूकता कार्यक्रम इसलिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं क्योंकि बच्चों में छोटी उम्र से ही स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण की आदत विकसित की जा सकती है। विद्यार्थी अपने परिवार और आसपास के लोगों को भी कचरा अलग करने, प्लास्टिक का इस्तेमाल कम करने और खुले में कचरा न फेंकने के लिए प्रेरित कर सकते हैं।
दिल्ली जैसे बड़े शहर में बढ़ती आबादी के साथ कचरा प्रबंधन एक महत्वपूर्ण शहरी चुनौती है। केवल सफाई अभियान चलाने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सकता। इसके लिए कचरा पैदा होने के स्तर पर ही उसे अलग करना, सार्वजनिक स्थानों पर कचरा न फैलाना और नागरिकों में जिम्मेदारी की भावना विकसित करना जरूरी है।
MCD की इस पहल में विद्यार्थियों को स्वच्छता से जुड़े विषयों पर जागरूक करना इसी दिशा में एक कदम है। यदि स्कूल, परिवार और स्थानीय प्रशासन मिलकर लगातार ऐसे अभियान चलाते हैं, तो स्वच्छता से जुड़े व्यवहार में लंबे समय तक सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।
स्वच्छ दिल्ली का लक्ष्य केवल सड़कों और सार्वजनिक स्थानों की सफाई तक सीमित नहीं होना चाहिए। इसके लिए नागरिकों की आदतों में बदलाव भी जरूरी है। कचरे को सही जगह डालना, गीले और सूखे कचरे को अलग रखना, प्लास्टिक का इस्तेमाल कम करना और खुले में कचरा न फैलाना ऐसे छोटे कदम हैं, जिनका सामूहिक प्रभाव पूरे शहर की स्वच्छता व्यवस्था पर पड़ सकता है।
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