बंगाल की खाड़ी में बना डिप्रेशन, झारखंड की ओर बढ़ेगा सिस्टम, कई राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट
मोहित गौतम (दिल्ली) : देश के पूर्वी हिस्सों में मानसून की गतिविधियां एक बार फिर तेज हो गई हैं। भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, उत्तर-पश्चिमी बंगाल की खाड़ी और उससे सटे पश्चिम बंगाल तथा उत्तर ओडिशा के तटीय इलाकों के ऊपर बना कम दबाव का क्षेत्र अब डिप्रेशन में बदल गया है। मौसम विभाग के मुताबिक यह सिस्टम अगले 24 घंटे के दौरान उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ते हुए गंगीय पश्चिम बंगाल को पार कर झारखंड की ओर बढ़ सकता है।
मौसम विभाग के अनुसार, यह डिप्रेशन 17 अगस्त 2026 को सुबह 5:30 बजे तटीय पश्चिम बंगाल और उससे सटे बांग्लादेश तथा उत्तर-पश्चिमी बंगाल की खाड़ी के ऊपर केंद्रित था। इसका केंद्र लगभग 22.5 डिग्री उत्तरी अक्षांश और 88.3 डिग्री पूर्वी देशांतर के पास बताया गया है। यह क्षेत्र कोलकाता से लगभग 80 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में, बांग्लादेश के सातखीरा से करीब 80 किलोमीटर पश्चिम-दक्षिण-पश्चिम में, पश्चिम बंगाल के बांकुड़ा से लगभग 160 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व और ओडिशा के बालेश्वर से करीब 180 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में स्थित है।
मौसम विभाग के मुताबिक डिप्रेशन के अगले 24 घंटे के दौरान उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ने की संभावना है। इसके बाद यह सिस्टम गंगीय पश्चिम बंगाल से होते हुए झारखंड की दिशा में बढ़ सकता है। इसके प्रभाव से पश्चिम बंगाल, झारखंड और आसपास के इलाकों में बारिश की गतिविधियों में तेजी आने की संभावना है।
बंगाल की खाड़ी में बनने वाले ऐसे मौसमी सिस्टम का असर केवल तटीय क्षेत्रों तक सीमित नहीं रहता। कम दबाव वाले क्षेत्र या डिप्रेशन के आगे बढ़ने के साथ इसके आसपास के क्षेत्रों में बादल सक्रिय हो सकते हैं और कई जगहों पर मध्यम से भारी बारिश देखने को मिल सकती है। सिस्टम की दिशा और तीव्रता के आधार पर बारिश का प्रभाव अलग-अलग क्षेत्रों में कम या ज्यादा हो सकता है।
गंगीय पश्चिम बंगाल के कई हिस्सों में इस मौसम प्रणाली के कारण बारिश जारी रहने की संभावना है। वहीं, झारखंड की ओर बढ़ने के बाद राज्य के विभिन्न हिस्सों में भी मानसूनी गतिविधियां तेज हो सकती हैं। निचले इलाकों में भारी बारिश होने की स्थिति में जलभराव और स्थानीय स्तर पर यातायात प्रभावित होने जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं।
ओडिशा के तटीय और आसपास के क्षेत्रों में भी इस सिस्टम की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। बंगाल की खाड़ी से आने वाली नमी के कारण पूर्वी भारत के कई हिस्सों में बारिश का दौर बना रह सकता है। पश्चिम बंगाल और झारखंड के अलावा आसपास के क्षेत्रों में भी मौसम में बदलाव देखने को मिल सकता है।
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, डिप्रेशन के आगे बढ़ने के दौरान हवा की गति और बारिश की तीव्रता पर नजर रखना जरूरी है। भारी बारिश वाले क्षेत्रों में लोगों को निचले इलाकों, जलभराव वाले रास्तों और कमजोर संरचनाओं से सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। स्थानीय प्रशासन और मौसम विभाग की ओर से जारी ताजा चेतावनियों का पालन करना भी जरूरी है।
राजधानी दिल्ली और उत्तर भारत के मौसम पर भी मानसूनी सिस्टम का अप्रत्यक्ष प्रभाव देखने को मिल सकता है, हालांकि किसी क्षेत्र में बारिश की स्थिति स्थानीय मौसम प्रणालियों और मानसून ट्रफ की स्थिति पर निर्भर करेगी। ऐसे में आने वाले दिनों में मौसम विभाग के अपडेट महत्वपूर्ण रहेंगे।
भारत मौसम विज्ञान विभाग लगातार इस डिप्रेशन की स्थिति, दिशा और इसके संभावित प्रभाव पर निगरानी रख रहा है। सिस्टम के उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ने के साथ झारखंड और आसपास के राज्यों के मौसम में बदलाव की संभावना बनी हुई है। लोगों को सलाह दी जाती है कि वे भारी बारिश के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचें और स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी मौसम संबंधी निर्देशों को गंभीरता से लें।
मानसून के दौरान बंगाल की खाड़ी में बनने वाले कम दबाव वाले क्षेत्र भारतीय मौसम व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं। ये सिस्टम नमी को अंदरूनी हिस्सों तक पहुंचाने में भूमिका निभाते हैं और इनके कारण कई राज्यों में बारिश की गतिविधियां बढ़ जाती हैं। इस समय बना डिप्रेशन भी पूर्वी भारत के मौसम को प्रभावित कर रहा है और अगले 24 घंटे इसके आगे बढ़ने की दिशा के लिहाज से महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
Khabar.com.IN अपने पाठकों से अपील करता है कि बारिश और मौसम संबंधी किसी भी चेतावनी को हल्के में न लें। विशेष रूप से भारी बारिश की स्थिति में नदी, नाले, जलभराव वाले क्षेत्रों और कमजोर इमारतों से दूरी बनाए रखें तथा स्थानीय प्रशासन की सलाह का पालन करें।