मोहित गौतम (दिल्ली) : दिल्ली में आयोजित BRICS शिखर सम्मेलन को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। दुनिया के कई प्रमुख देशों के राष्ट्राध्यक्षों और शीर्ष प्रतिनिधियों की भारत यात्रा के बीच भाजपा ने BRICS की उपयोगिता और भारत की वैश्विक भूमिका को लेकर विपक्ष के सवालों पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। भाजपा का कहना है कि बदलते वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक माहौल में भारत की भूमिका लगातार मजबूत हुई है और BRICS जैसे मंच देश के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग तथा आर्थिक अवसरों के नए रास्ते खोल सकते हैं।
भाजपा नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने भारत की वर्तमान आर्थिक स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि देश ने पिछले वर्षों में वैश्विक स्तर पर अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत किया है। उनके अनुसार, अंतरराष्ट्रीय आर्थिक चुनौतियों, भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक बाजार की अनिश्चितताओं के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था ने मजबूती और लचीलापन दिखाया है।
भाजपा ने अपने बयान में अंतरराष्ट्रीय आर्थिक संस्थाओं द्वारा भारत की विकास क्षमता और आर्थिक प्रदर्शन को लेकर किए गए आकलनों का भी उल्लेख किया। पार्टी का कहना है कि भारत आज दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और वैश्विक आर्थिक विकास में उसकी भूमिका लगातार बढ़ रही है।
भाजपा ने कांग्रेस के नेतृत्व वाले पूर्ववर्ती यूपीए शासनकाल की आर्थिक स्थिति की तुलना वर्तमान दौर से करते हुए कहा कि वर्ष 2011 से 2013 के बीच भारत को वैश्विक स्तर पर आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा था। उस समय निवेश, आर्थिक नीतियों और विकास की रफ्तार को लेकर कई सवाल उठे थे। भाजपा का दावा है कि उस दौर में भारत को उभरती अर्थव्यवस्थाओं के एक कमजोर समूह के रूप में भी देखा गया था।
पार्टी के अनुसार, पिछले वर्षों में आर्थिक सुधारों, बुनियादी ढांचे के विस्तार, डिजिटल अर्थव्यवस्था, विनिर्माण और निवेश को बढ़ावा देने के प्रयासों ने भारत की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में भूमिका निभाई है। भाजपा ने कहा कि भारत अब केवल एक बड़ा उपभोक्ता बाजार नहीं, बल्कि वैश्विक आर्थिक और रणनीतिक निर्णयों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला देश बनकर उभरा है।
BRICS शिखर सम्मेलन के संदर्भ में भाजपा का कहना है कि यह मंच सदस्य देशों को व्यापार, निवेश, वित्त, तकनीक और वैश्विक दक्षिण से जुड़े मुद्दों पर सहयोग का अवसर प्रदान करता है। बदलती विश्व व्यवस्था में भारत की सक्रिय भागीदारी को भाजपा ने देश के बढ़ते अंतरराष्ट्रीय प्रभाव से जोड़कर देखा है।
राजनीतिक बयानबाजी के बीच BRICS की भूमिका को लेकर अलग-अलग राजनीतिक दलों के अपने दृष्टिकोण हैं। विपक्ष जहां सरकार की विदेश नीति और अंतरराष्ट्रीय बैठकों के ठोस आर्थिक परिणामों पर सवाल उठाता रहा है, वहीं सरकार और सत्तारूढ़ दल का तर्क है कि वैश्विक मंचों पर भारत की सक्रिय उपस्थिति से देश के दीर्घकालिक आर्थिक और रणनीतिक हित मजबूत होते हैं।
दिल्ली में आयोजित BRICS शिखर सम्मेलन भारत के लिए कूटनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ऐसे समय में जब दुनिया भू-राजनीतिक संघर्षों, व्यापारिक प्रतिस्पर्धा, ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक अस्थिरता जैसी चुनौतियों से गुजर रही है, भारत की कोशिश विभिन्न देशों के बीच संवाद और सहयोग को बढ़ाने की है।
भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर राजनीतिक बहस भी लगातार तेज रही है। सरकार विकास दर, बुनियादी ढांचे, डिजिटल लेनदेन, विनिर्माण और वैश्विक निवेश में वृद्धि को अपनी उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत करती है। दूसरी ओर विपक्ष रोजगार, महंगाई, आय असमानता और आम नागरिकों पर आर्थिक दबाव जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाता है।
BRICS Summit 2026 के दौरान भारत की वैश्विक आर्थिक स्थिति और विदेश नीति पर चर्चा एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आ गई है। भाजपा ने जहां इसे भारत के बढ़ते वैश्विक प्रभाव और आर्थिक मजबूती का प्रतीक बताया है, वहीं राजनीतिक बहस के बीच यह सवाल भी महत्वपूर्ण रहेगा कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर होने वाले समझौते और सहयोग आम नागरिकों, व्यापार, रोजगार और देश की अर्थव्यवस्था पर कितना प्रभाव डालते हैं।
भारत के लिए BRICS जैसे मंचों का महत्व केवल कूटनीतिक बैठकों तक सीमित नहीं है। आने वाले समय में व्यापारिक सहयोग, नई तकनीक, निवेश, ऊर्जा सुरक्षा और विकासशील देशों के बीच साझेदारी जैसे मुद्दे इस मंच की दिशा और उपयोगिता तय कर सकते हैं। ऐसे में दिल्ली में आयोजित शिखर सम्मेलन को भारत की विदेश नीति और वैश्विक आर्थिक रणनीति के महत्वपूर्ण अवसर के रूप में देखा जा रहा है।
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