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Supreme Court on KENT Fans: Kent RO को बड़ा झटका, KENT नाम से पंखे बेचने पर रोक बरकरार

मोहित गौतम (दिल्ली) : सुप्रीम कोर्ट ने KENT नाम से पंखों की बिक्री को लेकर चल रहे ट्रेडमार्क विवाद में Kent RO Systems Limited को तत्काल राहत देने से इनकार कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट के उस अंतरिम आदेश में हस्तक्षेप करने से मना कर दिया, जिसके तहत Kent RO को KENT ट्रेडमार्क के तहत पंखों का निर्माण और बिक्री करने से रोका गया था। अदालत ने कहा कि हाई कोर्ट के अंतरिम आदेश में ऐसी कोई कानूनी गलती नहीं दिखाई देती, जिसके आधार पर सुप्रीम कोर्ट को उसमें हस्तक्षेप करना चाहिए। जस्टिस जेबी पार्डीवाला और जस्टिस विनोद चंद्रन की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि Kent RO और Kent Cables के बीच हाई कोर्ट में लंबित मुख्य मुकदमों की सुनवाई जल्द से जल्द की जाए। अदालत का मानना है कि मामले के अंतिम समाधान के लिए मुख्य विवाद की सुनवाई में अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए। यह विवाद KENT नाम के इस्तेमाल को लेकर है। Kent Cables का दावा है कि उसने 1984 में इंसुलेटेड वायर, केबल और इलेक्ट्रिकल कंपोनेंट्स के लिए KENT ट्रेडम...

CJP ने सरकार पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के राजनीतिक इस्तेमाल का आरोप लगाया, दोबारा आंदोलन की चेतावनी

मोहित गौतम (दिल्ली) : कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP ने सरकार पर सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेश की गलत राजनीतिक व्याख्या करने का आरोप लगाया है। पार्टी का कहना है कि आंदोलन में शामिल विद्यार्थियों और अन्य प्रदर्शनकारियों को कथित तौर पर परेशान किया जा रहा है तथा कुछ लोगों को हिरासत या गिरफ्तारी की आशंका का सामना करना पड़ रहा है। CJP ने चेतावनी दी है कि यदि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई का सिलसिला जारी रहा, तो वह केंद्र सरकार के खिलाफ फिर से बड़े स्तर पर आंदोलन शुरू कर सकती है। CJP का कहना है कि छात्र आंदोलन से जुड़े लोगों के खिलाफ दर्ज मामलों को लेकर सरकार को स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए। पार्टी के अनुसार, शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल विद्यार्थियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर को आगे बढ़ाने के बजाय उन पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए। संगठन ने यह भी कहा कि आंदोलन के दौरान दिए गए आश्वासनों का सम्मान होना जरूरी है। मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने CJP के नेतृत्व में जंतर मंतर और देश के विभिन्न राज्यों में हुए प्रदर्शनों से जुड़े मामलों पर सुनवाई करते हुए प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने क...

WhatsApp की प्राइवेसी पॉलिसी पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, Meta को चेतावनी: निजता से समझौता नहीं

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मोहित गौतम (दिल्ली) :  सुप्रीम कोर्ट ने WhatsApp और उसकी पैरेंट कंपनी Meta को प्राइवेसी पॉलिसी के मामले में कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने साफ शब्दों में कहा है कि भारतीय नागरिकों की निजता से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने यह भी संकेत दिया है कि यदि जरूरत पड़ी तो इस मामले में अंतरिम आदेश पारित किया जाएगा। यह मामला WhatsApp की वर्ष 2021 में लागू की गई प्राइवेसी पॉलिसी से जुड़ा है, जिसमें यूजर डेटा को Meta की अन्य कंपनियों के साथ साझा करने की बात कही गई थी। इसी नीति के खिलाफ Competition Commission of India ने पहले WhatsApp पर भारी जुर्माना लगाया था, जिसे Meta और WhatsApp ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश की पीठ ने Meta से सीधा सवाल किया कि क्या कोई निजी कंपनी भारत में काम करते हुए नागरिकों के मौलिक अधिकारों को नजरअंदाज कर सकती है। कोर्ट ने कहा कि निजता का अधिकार संविधान द्वारा संरक्षित है और तकनीकी कंपनियां इसे कमजोर नहीं कर सकतीं। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि यदि किसी ऐप की प्राइवेसी पॉलिसी इतनी जटिल हो कि आम यूजर उसे समझ ...

सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले पर लगाई रोक, 2006 मुंबई ट्रेन ब्लास्ट केस में नया मोड़

मोहित गौतम (दिल्ली) :  2006 के मुंबई लोकल ट्रेन बम धमाकों के मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा 12 आरोपियों को बरी किए जाने के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल रोक लगा दी है। महाराष्ट्र सरकार की याचिका पर सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने कहा कि हाईकोर्ट का फैसला अभी लागू नहीं होगा। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि सभी आरोपी तत्काल जेल नहीं लौटेंगे, लेकिन हाईकोर्ट का निर्णय किसी अन्य मामले में कानूनी मिसाल नहीं माना जाएगा, जब तक अंतिम आदेश नहीं आता। हाईकोर्ट का फैसला क्यों था चर्चा में 21 जुलाई 2025 को बॉम्बे हाईकोर्ट की बेंच ने कहा था कि अभियोजन पक्ष ने आरोप साबित करने में गंभीर चूक की है। गवाहों की पहचान को अविश्वसनीय माना गया कथित बम सामग्री के सबूत पर भी संदेह जताया गया आरोपियों के कबूलनामे को जबरन बताया गया इन आधारों पर अदालत ने सभी 12 आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया था। इस निर्णय को महाराष्ट्र सरकार ने “चौंकाने वाला” बताते हुए सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। सुप्रीम कोर्ट में सरकार की दलील महाराष्ट्र सरकार ने कहा कि हाईकोर्ट के फैसले से न सिर्फ न्याय प्रभ...