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सितंबर की शुरुआत में बदला मौसम का मिजाज, कई राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट, झारखंड में अत्यंत भारी बारिश की चेतावनी

मोहित गौतम (दिल्ली) : सितंबर महीने की शुरुआत के साथ ही देश के कई हिस्सों में मानसून एक बार फिर सक्रिय नजर आ रहा है। भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार गंगा के मैदानी इलाकों वाले पश्चिम बंगाल और उससे सटे उत्तरी तटीय ओडिशा, झारखंड तथा उत्तर-पश्चिमी बंगाल की खाड़ी के ऊपर एक अच्छी तरह से चिह्नित निम्न दबाव का क्षेत्र बना हुआ है। इसके प्रभाव से पूर्वी और मध्य भारत के कई राज्यों में अगले कुछ दिनों के दौरान भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है।

मौसम विभाग के मुताबिक 1 सितंबर को ओडिशा, झारखंड, बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश और गंगा के मैदानी क्षेत्रों वाले पश्चिम बंगाल में कहीं-कहीं भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। झारखंड में 1 सितंबर को कुछ स्थानों पर अत्यंत भारी बारिश की संभावना को देखते हुए विशेष सतर्कता की जरूरत है। इसके अलावा छत्तीसगढ़ में 1 और 2 सितंबर, पूर्वी मध्य प्रदेश में 1 से 4 सितंबर और पश्चिमी मध्य प्रदेश में 3 से 5 सितंबर के दौरान बारिश की गतिविधियां तेज रह सकती हैं।

मौसम प्रणाली के अगले 48 घंटों के दौरान उत्तर ओडिशा और झारखंड से होते हुए पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ने की संभावना है। इससे इस क्षेत्र के साथ-साथ आसपास के राज्यों में बारिश का असर देखने को मिल सकता है।

दिल्ली, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में भी बारिश का दौर

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में भी मौसम में बदलाव देखने को मिल सकता है। मौसम विभाग के अनुसार हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली में 3 और 4 सितंबर को काफी व्यापक स्तर पर बारिश की संभावना है। वहीं 1 और 2 सितंबर को भी कुछ स्थानों पर बारिश हो सकती है। 2 से 4 सितंबर के दौरान दिल्ली और आसपास के इलाकों में गरज चमक के साथ बारिश की संभावना को देखते हुए लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

उत्तर प्रदेश में भी बारिश का असर बना रह सकता है। पूर्वी उत्तर प्रदेश में 1 और 2 सितंबर को बारिश की संभावना है, जबकि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 1 से 5 सितंबर के बीच अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है। पूर्वी उत्तर प्रदेश में 2 सितंबर को भारी बारिश और 1 सितंबर को कहीं-कहीं बहुत भारी बारिश की संभावना जताई गई है।

उत्तराखंड में 1 से 7 सितंबर के दौरान बारिश की गतिविधियां बनी रहने की संभावना है। 1 सितंबर को कुछ स्थानों पर बहुत भारी बारिश हो सकती है, जबकि 2 से 7 सितंबर के दौरान भारी बारिश की संभावना है। पहाड़ी इलाकों में लगातार बारिश की स्थिति में स्थानीय स्तर पर भूस्खलन, सड़क बाधित होने और जलभराव जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं।

मध्य भारत में भी सक्रिय रहेगा मानसून

मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में भी बारिश का प्रभाव देखने को मिलेगा। पूर्वी मध्य प्रदेश में 1 से 5 सितंबर के दौरान काफी व्यापक बारिश होने की संभावना है, जबकि पश्चिमी मध्य प्रदेश में 2 से 7 सितंबर तक बारिश का दौर रह सकता है। पूर्वी मध्य प्रदेश में 1 से 4 सितंबर के दौरान कहीं-कहीं बहुत भारी बारिश होने की संभावना है।

छत्तीसगढ़ में 1 से 4 सितंबर के दौरान कई स्थानों पर बारिश की संभावना है। 1 और 2 सितंबर को कुछ स्थानों पर बहुत भारी बारिश भी हो सकती है। बारिश के साथ गरज चमक और बिजली गिरने की घटनाओं की संभावना को देखते हुए खुले स्थानों पर सावधानी बरतना जरूरी होगा।

मौसम विभाग ने यह भी बताया है कि पश्चिमी मध्य प्रदेश में 3 से 5 सितंबर के दौरान बहुत भारी बारिश हो सकती है। ऐसे में निचले इलाकों और जलभराव की आशंका वाले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को मौसम की स्थिति पर नजर रखनी चाहिए।

पूर्वी भारत में बारिश का ज्यादा असर

पश्चिम बंगाल, झारखंड, बिहार और ओडिशा में सितंबर की शुरुआत बारिश के लिहाज से काफी सक्रिय रहने वाली है। इन राज्यों में 1 और 2 सितंबर के दौरान कई स्थानों पर व्यापक बारिश होने की संभावना है। झारखंड में 1 सितंबर को अत्यंत भारी बारिश की चेतावनी सबसे महत्वपूर्ण मौसम संकेतों में से एक है।

बिहार में 2 से 4 सितंबर के दौरान भारी बारिश की संभावना है और 1 सितंबर को कुछ स्थानों पर बहुत भारी बारिश हो सकती है। ओडिशा में 2 सितंबर को भारी बारिश तथा 1 सितंबर को कुछ स्थानों पर बहुत भारी बारिश की संभावना है। गंगा के मैदानी पश्चिम बंगाल में भी 1 और 2 सितंबर के आसपास भारी बारिश का दौर जारी रह सकता है।

पहाड़ी राज्यों में भी सतर्कता जरूरी

जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में भी सितंबर के शुरुआती दिनों में मानसून और पश्चिमी मौसम प्रणालियों के प्रभाव से बारिश जारी रहने की संभावना है। हिमाचल प्रदेश में 1 से 5 सितंबर तक व्यापक बारिश हो सकती है, जबकि उत्तराखंड में 1 से 7 सितंबर तक बारिश का दौर बने रहने की संभावना है।

बारिश के दौरान पहाड़ी क्षेत्रों में यात्रा करने वाले लोगों को स्थानीय प्रशासन और मौसम विभाग की चेतावनियों पर विशेष ध्यान देना चाहिए। अचानक तेज बारिश के कारण नदियों और नालों का जलस्तर बढ़ सकता है तथा संवेदनशील क्षेत्रों में सड़क यातायात प्रभावित हो सकता है।

बंगाल की खाड़ी से बनी प्रणाली का असर

मौसम विशेषज्ञों के अनुसार मौजूदा मौसम गतिविधि का मुख्य कारण बंगाल की खाड़ी और उससे सटे पूर्वी भारत के ऊपर बना निम्न दबाव का क्षेत्र है। इसके साथ ऊपरी वायुमंडल में चक्रवाती परिसंचरण भी मौजूद है, जो मौसम प्रणाली को मजबूती दे रहा है। IMD के अनुसार यह प्रणाली अगले 48 घंटों में उत्तर ओडिशा और झारखंड की ओर से पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ सकती है।

इसके कारण पूर्वी भारत से लेकर मध्य भारत तक बारिश की गतिविधियां बढ़ने की संभावना है। वहीं दक्षिणी प्रायद्वीपीय भारत में अगले करीब एक सप्ताह तक बारिश की गतिविधि अपेक्षाकृत कम रहने का अनुमान है।

लोगों को सावधानी बरतने की सलाह

भारी बारिश और गरज चमक के दौरान लोगों को खुले स्थानों, पेड़ों और बिजली के खंभों के नीचे खड़े होने से बचना चाहिए। निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को जलभराव की स्थिति पर नजर रखनी चाहिए। किसानों को भी स्थानीय मौसम पूर्वानुमान के अनुसार कृषि गतिविधियों की योजना बनाने की सलाह दी जाती है।

बारिश के दौरान सड़क पर वाहन चलाते समय गति कम रखना और जलभराव वाले रास्तों से बचना जरूरी है। मौसम विभाग और स्थानीय प्रशासन की ओर से जारी चेतावनियों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

सितंबर की शुरुआत में पूर्वी और मध्य भारत के लिए मौसम का यह बदलाव खासा महत्वपूर्ण है। झारखंड में अत्यंत भारी बारिश की संभावना और कई राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश के पूर्वानुमान को देखते हुए अगले कुछ दिन सतर्क रहने की जरूरत है। दिल्ली, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड समेत उत्तर भारत के कई हिस्सों में भी बारिश का असर बना रह सकता है।

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