नशे के खिलाफ केंद्र सरकार की रणनीति: पहचान, उपचार और पुनर्वास पर जोर, BJP ने गिनाईं उपलब्धियां
मोहित गौतम (दिल्ली) : भारत में नशे की समस्या को लेकर केंद्र सरकार की कार्रवाई और नशामुक्त समाज के लक्ष्य पर एक बार फिर राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी ने केंद्र सरकार की नशे के खिलाफ चल रही रणनीति को लेकर कई आंकड़े साझा करते हुए कहा है कि सरकार केवल नशे के कारोबार पर कार्रवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि नशे की चपेट में आए लोगों की पहचान, इलाज और पुनर्वास पर भी व्यापक स्तर पर काम किया जा रहा है। पार्टी के अनुसार, नशामुक्त भारत के लिए सरकार की नीति का आधार पहचान, उपचार और पुनर्वास है।
BJP की ओर से साझा जानकारी के अनुसार, नशे की समस्या से निपटने के लिए विभिन्न स्तरों पर केंद्र और राज्य सरकारों के सहयोग से योजनाएं चलाई जा रही हैं। पार्टी ने दावा किया कि देशभर में बड़ी संख्या में नशा मुक्ति और उपचार से जुड़ी सुविधाओं को मजबूत किया गया है, ताकि नशे की गिरफ्त में आए लोगों को केवल कानूनी कार्रवाई का सामना न करना पड़े, बल्कि उन्हें सामान्य जीवन में लौटने का अवसर भी मिल सके।
पार्टी के अनुसार, नशे के खिलाफ अभियान में लगभग 350 Integrated Rehabilitation Centres for Addicts यानी IRCA को सरकारी सहायता दी जा रही है। इन केंद्रों का उद्देश्य नशे की लत से जूझ रहे लोगों को उपचार, परामर्श और पुनर्वास की सुविधाएं उपलब्ध कराना है। नशे की समस्या केवल कानून व्यवस्था का विषय नहीं है, बल्कि यह सामाजिक और स्वास्थ्य से जुड़ी चुनौती भी है। ऐसे में पुनर्वास केंद्रों की भूमिका काफी महत्वपूर्ण मानी जाती है।
BJP ने यह भी कहा कि देश में 46 Community Peer Led Intervention यानी CPLI केंद्रों को केंद्र सरकार का सहयोग मिल रहा है। इन केंद्रों के माध्यम से समुदाय स्तर पर नशे के खिलाफ जागरूकता और सहायता कार्यक्रम चलाने पर जोर दिया जा रहा है। नशे की समस्या से प्रभावित युवाओं और अन्य लोगों तक सीधे पहुंच बनाने के लिए स्थानीय समुदायों की भागीदारी को महत्वपूर्ण माना जाता है।
सरकारी अस्पतालों में भी नशा उपचार से जुड़ी सुविधाओं को बढ़ाने का दावा किया गया है। BJP के अनुसार, देश के सरकारी अस्पतालों में 142 Addiction Treatment Facilities उपलब्ध हैं। इन सुविधाओं के माध्यम से नशे की लत से प्रभावित लोगों को चिकित्सकीय सहायता दी जाती है। गंभीर नशे की स्थिति में केवल सामाजिक परामर्श पर्याप्त नहीं होता, इसलिए मेडिकल ट्रीटमेंट और विशेषज्ञों की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
पार्टी द्वारा साझा आंकड़ों में 1,446 जिलों में जागरूकता कार्यक्रमों का भी उल्लेख किया गया है। नशे के खिलाफ लड़ाई में जागरूकता को सबसे प्रभावी माध्यमों में से एक माना जाता है। विशेष रूप से युवाओं और छात्रों को नशे के दुष्प्रभावों के बारे में जानकारी देना, परिवारों को सतर्क करना और समाज को नशे के कारोबार के खिलाफ जागरूक बनाना इस अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
BJP ने अपने संदेश में यह भी कहा कि नशामुक्त समाज का निर्माण केवल नशे के पदार्थों की जब्ती या तस्करों के खिलाफ कार्रवाई से संभव नहीं होगा। इसके लिए नशे की चपेट में आए लोगों को पहचानना, उन्हें समय पर उपचार उपलब्ध कराना और उपचार के बाद समाज में दोबारा स्थापित करने की व्यवस्था करना भी जरूरी है। इसी सोच के तहत पहचान, उपचार और पुनर्वास को अभियान का प्रमुख आधार बताया गया है।
भारत में नशे की समस्या का असर केवल व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका प्रभाव परिवार, समाज और देश की युवा शक्ति पर भी पड़ता है। नशे की लत के कारण कई परिवार आर्थिक और मानसिक संकट का सामना करते हैं। इसलिए सरकारों के सामने दोहरी चुनौती रहती है। एक तरफ नशीले पदार्थों की तस्करी और अवैध कारोबार पर कार्रवाई करनी होती है, वहीं दूसरी तरफ नशे की लत से प्रभावित लोगों को उपचार और नई जिंदगी का अवसर देना होता है।
BJP द्वारा साझा किए गए आंकड़ों को लेकर राजनीतिक बहस अलग हो सकती है, लेकिन नशे के खिलाफ व्यापक सामाजिक अभियान की जरूरत पर लगभग सभी की सहमति है। विशेषज्ञ भी मानते हैं कि नशे की समस्या से निपटने के लिए पुलिस कार्रवाई, स्वास्थ्य सेवाएं, परिवार का सहयोग, स्कूलों और कॉलेजों में जागरूकता तथा पुनर्वास व्यवस्था को एक साथ मजबूत करना जरूरी है।
नशामुक्त भारत का लक्ष्य केवल सरकारी योजनाओं से हासिल नहीं किया जा सकता। इसमें समाज, परिवार, शिक्षण संस्थानों और युवाओं की भी बड़ी भूमिका है। यदि नशे की चपेट में आए व्यक्ति को अपराधी की तरह देखने के बजाय जरूरत के अनुसार उपचार और पुनर्वास की सुविधा दी जाए, तो उसके सामान्य जीवन में लौटने की संभावना बढ़ सकती है। वहीं नशीले पदार्थों की तस्करी और अवैध नेटवर्क के खिलाफ सख्त कार्रवाई भी उतनी ही आवश्यक है।
केंद्र सरकार और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय के साथ नशे के खिलाफ अभियान को लगातार आगे बढ़ाने की जरूरत है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि उपचार केंद्रों, पुनर्वास सुविधाओं और जागरूकता अभियानों का विस्तार किस तरह जमीन पर लोगों तक पहुंचता है। नशामुक्त समाज की दिशा में सफलता तभी संभव होगी, जब रोकथाम, उपचार और पुनर्वास तीनों स्तरों पर लगातार और प्रभावी काम किया जाए।
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