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भारत की इलेक्ट्रोमैग्नेटिक युद्ध क्षमता को नई दिशा देने की तैयारी, DRDO के SHIELD Programme पर जोर

मोहित गौतम (दिल्ली) : भारत भविष्य के युद्धक्षेत्र की बदलती चुनौतियों को देखते हुए अत्याधुनिक रक्षा तकनीकों पर तेजी से काम कर रहा है। इलेक्ट्रॉनिक युद्ध, डायरेक्टेड एनर्जी तकनीक और ड्रोन से उत्पन्न खतरों का मुकाबला करने की क्षमता को मजबूत करने की दिशा में DRDO के SHIELD Programme को महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है। भारतीय जनता पार्टी ने इस कार्यक्रम से जुड़ी जानकारी साझा करते हुए कहा है कि भारत भविष्य के इलेक्ट्रोमैग्नेटिक युद्धक्षेत्र के लिए अपनी तकनीकी क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

आधुनिक युद्ध केवल पारंपरिक हथियारों और सैन्य शक्ति तक सीमित नहीं रह गया है। इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम, संचार नेटवर्क, सेंसर और मानव रहित प्रणालियां आज किसी भी सैन्य अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी हैं। ऐसे में दुश्मन के इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को प्रभावित करने, अपनी प्रणालियों को सुरक्षित रखने और ड्रोन जैसे आधुनिक खतरों का सामना करने के लिए नई तकनीकों की आवश्यकता लगातार बढ़ रही है।

SHIELD Programme के तहत उच्च शक्ति वाली माइक्रोवेव तकनीक और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक प्रभावों से संबंधित प्रणालियों के परीक्षण एवं मूल्यांकन पर काम किए जाने की बात सामने आई है। इसमें एस-बैंड माइक्रोवेव मूल्यांकन प्रणाली और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों पर उच्च शक्ति वाली माइक्रोवेव ऊर्जा के प्रभाव का अध्ययन जैसी क्षमताएं शामिल हो सकती हैं। इस तरह की तकनीक का उद्देश्य आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक प्रणालियों की मजबूती और सुरक्षा का परीक्षण करना है।

कार्यक्रम से जुड़ी जानकारी के अनुसार, उच्च विद्युत क्षेत्र की परिस्थितियों में इलेक्ट्रॉनिक प्रणालियों के व्यवहार और उनकी सुरक्षा क्षमता का परीक्षण भी महत्वपूर्ण क्षेत्र हो सकता है। आधुनिक सैन्य प्लेटफॉर्म बड़ी संख्या में इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों पर निर्भर हैं। ऐसे में इलेक्ट्रोमैग्नेटिक प्रभावों से उपकरणों की सुरक्षा और संभावित खतरों के प्रति उनकी क्षमता का मूल्यांकन भविष्य की रक्षा तैयारियों में महत्वपूर्ण माना जाता है।

ड्रोन तकनीक के तेजी से बढ़ते उपयोग ने भी दुनिया भर की सेनाओं के सामने नई चुनौती खड़ी की है। छोटे और कम लागत वाले ड्रोन निगरानी, टोही और अन्य सैन्य उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल किए जा सकते हैं। ऐसे खतरों का मुकाबला करने के लिए भारत अपनी काउंटर-ड्रोन क्षमताओं को मजबूत करने पर ध्यान दे रहा है। इलेक्ट्रॉनिक और डायरेक्टेड एनर्जी आधारित तकनीकें भविष्य में ड्रोन खतरों से निपटने वाली रक्षा प्रणालियों का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकती हैं।

भविष्य के युद्धक्षेत्र में तकनीकी श्रेष्ठता का महत्व लगातार बढ़ रहा है। पारंपरिक सैन्य ताकत के साथ-साथ इलेक्ट्रॉनिक युद्ध, साइबर सुरक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, स्वायत्त प्रणालियां और उन्नत सेंसर अब राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति के महत्वपूर्ण हिस्से बनते जा रहे हैं। भारत भी स्वदेशी रक्षा अनुसंधान और नई तकनीकों के विकास के माध्यम से इन क्षेत्रों में अपनी क्षमता बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है।

रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, भविष्य में किसी भी संघर्ष की सफलता केवल हथियारों की संख्या पर निर्भर नहीं करेगी, बल्कि इस बात पर भी निर्भर करेगी कि किसी देश की इलेक्ट्रॉनिक और तकनीकी प्रणालियां कितनी सुरक्षित, सक्षम और प्रभावी हैं। इसी कारण इलेक्ट्रोमैग्नेटिक तकनीक और आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक सुरक्षा प्रणालियों पर अनुसंधान को रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

भारत की रक्षा तकनीक में हो रहे बदलाव यह संकेत देते हैं कि देश भविष्य की चुनौतियों के लिए अपनी तैयारी को व्यापक बनाने की कोशिश कर रहा है। इलेक्ट्रॉनिक युद्ध और काउंटर-ड्रोन जैसी क्षमताओं के विकास से भारतीय रक्षा प्रणाली को आधुनिक युद्धक्षेत्र की नई परिस्थितियों के अनुरूप तैयार करने में मदद मिल सकती है। आने वाले वर्षों में यह क्षेत्र भारत की स्वदेशी रक्षा तकनीक और रणनीतिक क्षमताओं के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

Khabar.com.IN

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