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मध्य प्रदेश और राजस्थान में भारी बारिश की चेतावनी, 4-5 सितंबर को कई इलाकों में बढ़ेगी मानसूनी गतिविधि

मोहित गौतम (दिल्ली) : मध्य प्रदेश और राजस्थान समेत देश के कई हिस्सों में मानसून सक्रिय बना हुआ है। भारत मौसम विज्ञान विभाग यानी IMD के 4 सितंबर 2026 के मौसम पूर्वानुमान के अनुसार, उत्तर मध्य प्रदेश के मध्य हिस्सों और उससे सटे दक्षिणी उत्तर प्रदेश के ऊपर बने Well Marked Low Pressure Area के प्रभाव से मध्य भारत के कई क्षेत्रों में बारिश की गतिविधि बढ़ सकती है।

मौसम विभाग के अनुसार, 4 सितंबर को पूर्वी मध्य प्रदेश में कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है। वहीं पूर्वी राजस्थान और पश्चिमी मध्य प्रदेश में 4 और 5 सितंबर को अलग-अलग स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। इस मौसम प्रणाली के कारण मध्य प्रदेश के कई हिस्सों में अगले कुछ दिनों तक मौसम सक्रिय रहने का अनुमान है।

पूर्वी मध्य प्रदेश में 4 सितंबर को बारिश का असर अधिक दिखाई दे सकता है। इससे पहले भी क्षेत्र में तेज बारिश की स्थिति बनी हुई थी। निम्न दबाव क्षेत्र के प्रभाव के कारण कई इलाकों में बादल छाए रहने, तेज बारिश और गरज के साथ बौछारें पड़ने की संभावना है।

पश्चिमी मध्य प्रदेश में 4 और 5 सितंबर को भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना को देखते हुए लोगों को सावधानी बरतने की जरूरत है। भारी बारिश के कारण निचले इलाकों में पानी भरने, सड़कों पर जलभराव होने और स्थानीय यातायात प्रभावित होने जैसी परिस्थितियां बन सकती हैं।

पूर्वी राजस्थान में भी 4 सितंबर को भारी से बहुत भारी बारिश का अनुमान है। इसके बाद 5 सितंबर को भी कुछ इलाकों में भारी बारिश जारी रह सकती है। राजस्थान के जिन क्षेत्रों में पहले से जलभराव या नदी-नालों में पानी का स्तर बढ़ा हुआ है, वहां लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत होगी।

मौसम प्रणाली का प्रभाव दक्षिणी उत्तर प्रदेश के आसपास भी देखने को मिल सकता है। उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में आने वाले दिनों में बारिश की गतिविधियां जारी रहने का अनुमान है। विशेष रूप से पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 4 से 7 सितंबर के बीच कुछ स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है।

उत्तर भारत के अन्य राज्यों में भी मौसम पूरी तरह सामान्य नहीं रहेगा। पंजाब में 4 से 9 सितंबर के दौरान कुछ स्थानों पर बारिश होने की संभावना है। हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली में भी अगले कुछ दिनों के दौरान मौसम में बदलाव देखने को मिल सकता है। पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश की गतिविधि अधिक रहने की संभावना है।

उत्तराखंड में बारिश का दौर अगले कई दिनों तक जारी रहने का अनुमान है। हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के कुछ हिस्सों में भी बारिश हो सकती है। पहाड़ी इलाकों में भारी बारिश के दौरान भूस्खलन, अचानक जलभराव और स्थानीय मार्गों पर यातायात बाधित होने का खतरा बढ़ सकता है।

मध्य भारत के अलावा देश के पूर्वी और पूर्वोत्तर हिस्सों में भी मानसूनी गतिविधि बनी रहने की संभावना है। पश्चिम बंगाल, सिक्किम, झारखंड और बिहार के कई हिस्सों में बारिश हो सकती है। कुछ स्थानों पर भारी बारिश के साथ गरज और बिजली गिरने की घटनाएं भी हो सकती हैं।

पूर्वोत्तर राज्यों में भी आने वाले दिनों में बारिश का सिलसिला जारी रहने की संभावना है। अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में कई स्थानों पर बारिश हो सकती है। अरुणाचल प्रदेश में 4 सितंबर के बाद भी कुछ इलाकों में भारी बारिश की संभावना बनी हुई है।

पश्चिमी भारत में कोंकण और गोवा में व्यापक बारिश का अनुमान है। गुजरात, महाराष्ट्र और आसपास के क्षेत्रों में भी अलग-अलग स्थानों पर बारिश हो सकती है। कुछ इलाकों में गरज के साथ तेज हवाएं चलने की संभावना को देखते हुए लोगों को मौसम के बदलाव पर नजर रखने की सलाह दी गई है।

दक्षिण भारत में अगले 6 से 7 दिनों के दौरान बारिश की गतिविधि अपेक्षाकृत कम रहने का अनुमान है। हालांकि तटीय कर्नाटक और कुछ अन्य क्षेत्रों में बारिश जारी रह सकती है। स्थानीय मौसम परिस्थितियों के कारण अलग-अलग स्थानों पर गरज के साथ बारिश और तेज हवाएं भी देखने को मिल सकती हैं।

मौसम विभाग के अनुसार मौजूदा मौसम प्रणाली का सबसे महत्वपूर्ण प्रभाव मध्य भारत के हिस्सों में देखने को मिल रहा है। ऐसे में मध्य प्रदेश और राजस्थान के लोगों को विशेष रूप से अगले दो दिनों के दौरान मौसम संबंधी अपडेट पर नजर रखनी चाहिए।

भारी बारिश के दौरान लोगों को निचले इलाकों और जलभराव वाली सड़कों से दूर रहने की सलाह दी जाती है। बिजली चमकने के दौरान खुले मैदान, ऊंचे पेड़ और बिजली के खंभों के पास खड़े होने से बचना चाहिए। वाहन चालकों को भी पानी से भरी सड़कों पर सावधानी से वाहन चलाना चाहिए।

किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को स्थानीय मौसम परिस्थितियों के अनुसार अपनी गतिविधियों की योजना बनाने की जरूरत है। नदी, नाले और अन्य जलस्रोतों के आसपास रहने वाले लोगों को अचानक बढ़ते जलस्तर को लेकर सतर्क रहना चाहिए।

फिलहाल 4 और 5 सितंबर मध्य प्रदेश तथा राजस्थान के कई हिस्सों के लिए मौसम की दृष्टि से महत्वपूर्ण रहने वाले हैं। उत्तर मध्य प्रदेश और आसपास बने निम्न दबाव क्षेत्र के प्रभाव से बारिश की गतिविधि बनी रह सकती है। आने वाले दिनों में इस मौसम प्रणाली की स्थिति और दिशा के अनुसार बारिश के प्रभाव में बदलाव हो सकता है।

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