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अरावली मामले में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा कदम, पुराने आदेश पर लगाई रोक

मोहित गौतम (दिल्ली) : अरावली पर्वतमाला से जुड़े पर्यावरणीय विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसला लेते हुए अपने पहले के आदेश पर रोक लगा दी है। अदालत ने कहा है कि इस मामले में अभी स्थिति को यथावत रखा जाएगा और केंद्र सरकार से स्पष्ट समाधान प्रस्तुत करने को कहा गया है। यह फैसला अरावली क्षेत्र में खनन और पर्यावरण संरक्षण को लेकर चल रही बहस के बीच आया है।

सुप्रीम कोर्ट ने यह कदम इसलिए उठाया है क्योंकि अरावली रेंज की परिभाषा और उसके संरक्षण को लेकर कई तकनीकी और कानूनी सवाल सामने आए हैं। अदालत का मानना है कि बिना सभी पक्षों की स्पष्ट राय और वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर कोई अंतिम निर्णय लेना उचित नहीं होगा। इसी वजह से केंद्र सरकार से इस विषय पर विस्तृत रिपोर्ट और समाधान मांगा गया है।

अरावली पर्वतमाला देश की सबसे पुरानी पहाड़ी श्रृंखलाओं में से एक है और इसका फैलाव कई राज्यों तक है। यह क्षेत्र जल संरक्षण, पर्यावरण संतुलन और प्रदूषण नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, अरावली का कमजोर होना दिल्ली एनसीआर समेत आसपास के इलाकों में बढ़ते प्रदूषण और जल संकट का बड़ा कारण बन सकता है।

पिछले आदेश के बाद यह आशंका जताई जा रही थी कि अरावली के कई हिस्से संरक्षण के दायरे से बाहर हो सकते हैं। इसी को लेकर पर्यावरण कार्यकर्ताओं और सामाजिक संगठनों ने चिंता जताई थी। सुप्रीम कोर्ट द्वारा आदेश पर रोक लगाए जाने से इन वर्गों को फिलहाल राहत मिली है।

अदालत ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि वह अरावली से जुड़े सभी पहलुओं पर राज्यों के साथ समन्वय कर एक स्पष्ट नीति और समाधान पेश करे। इसमें पर्यावरण सुरक्षा, खनन गतिविधियों का नियंत्रण और स्थानीय लोगों के हितों को संतुलित करने पर जोर दिया गया है।

अब इस मामले की अगली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट केंद्र द्वारा दिए गए जवाब और समाधान पर विचार करेगा। इसके बाद ही यह तय होगा कि अरावली पर्वतमाला के संरक्षण और विकास से जुड़े मामलों में आगे की दिशा क्या होगी। यह मामला आने वाले समय में पर्यावरण नीति के लिए एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन सकता है।