RSS का नया स्वरूप: संगठनात्मक बदलाव और BJP से संबंधों पर मंथन
मोहित गौतम (दिल्ली) : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपने 100वें स्थापना वर्ष में प्रवेश करने की तैयारी के साथ संगठनात्मक स्तर पर बड़े बदलावों पर विचार कर रहा है। संघ का उद्देश्य आने वाले समय की सामाजिक और राजनीतिक चुनौतियों के अनुरूप अपनी संरचना को अधिक प्रभावी और लचीला बनाना बताया जा रहा है। इस ऐतिहासिक अवसर को संगठन आत्ममंथन और पुनर्गठन के रूप में देख रहा है।
सूत्रों के अनुसार संघ अपने मौजूदा प्रशासनिक ढांचे में बदलाव कर सकता है, जिससे जमीनी स्तर पर काम करने वाले स्वयंसेवकों और शीर्ष नेतृत्व के बीच बेहतर तालमेल स्थापित हो सके। वर्तमान में संघ कई प्रांतों के माध्यम से कार्य करता है, लेकिन भविष्य में इकाइयों की संख्या बढ़ाकर उन्हें अधिक छोटे और प्रबंधनीय क्षेत्रों में बांटने पर विचार किया जा रहा है। इससे निर्णय प्रक्रिया तेज होने और स्थानीय मुद्दों पर बेहतर प्रतिक्रिया मिलने की संभावना जताई जा रही है।

इस संभावित बदलाव का एक अहम पहलू भारतीय जनता पार्टी के साथ संघ के संबंधों से भी जुड़ा हुआ है। दशकों से संघ और भाजपा के बीच वैचारिक और संगठनात्मक तालमेल रहा है, लेकिन अब संघ चाहता है कि उसका सामाजिक और वैचारिक कार्य राजनीतिक गतिविधियों से स्पष्ट रूप से अलग दिखाई दे। इसका उद्देश्य संगठन की स्वतंत्र पहचान को और मजबूत करना बताया जा रहा है।
संघ के भीतर इस विषय पर लंबे समय से विचार विमर्श चल रहा है। माना जा रहा है कि शताब्दी वर्ष के दौरान होने वाली महत्वपूर्ण बैठकों में इन प्रस्तावों पर अंतिम निर्णय लिया जा सकता है। संघ नेतृत्व का मानना है कि समय के साथ बदलाव आवश्यक है, ताकि संगठन समाज के हर वर्ग तक अपनी विचारधारा और सेवा कार्यों को प्रभावी ढंग से पहुंचा सके।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यदि संघ अपने ढांचे में बदलाव करता है और भाजपा के साथ संबंधों को नए संतुलन में रखता है, तो इसका असर देश की राजनीति पर भी पड़ सकता है। हालांकि संघ की प्राथमिकता सामाजिक संगठन के रूप में अपनी भूमिका को और मजबूत करना ही बताई जा रही है।
कुल मिलाकर RSS का 100वां वर्ष केवल उत्सव का अवसर नहीं, बल्कि संगठन के लिए आत्ममूल्यांकन और भविष्य की दिशा तय करने का महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है। आने वाले महीनों में संघ की ओर से लिए जाने वाले फैसले उसके अगले कई दशकों की कार्यशैली को प्रभावित कर सकते हैं।