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भारत में फूड सिक्योरिटी 2030: क्या देश बढ़ती आबादी का पेट भर पाएगा

मोहित गौतम (दिल्ली) : भारत में खाद्य सुरक्षा आने वाले वर्षों में एक गंभीर राष्ट्रीय चुनौती के रूप में उभर रही है। बढ़ती जनसंख्या, बदलते खानपान के पैटर्न और जलवायु परिवर्तन ने देश की कृषि और खाद्य आपूर्ति व्यवस्था पर गहरा दबाव डालना शुरू कर दिया है। वर्ष 2030 तक भारत की आबादी में उल्लेखनीय वृद्धि होने की संभावना है, ऐसे में यह सवाल और भी महत्वपूर्ण हो जाता है कि क्या देश सभी नागरिकों को पर्याप्त और पोषक भोजन उपलब्ध करा पाएगा।

भारत आज विश्व के प्रमुख कृषि उत्पादक देशों में शामिल है, इसके बावजूद कुपोषण और भूख की समस्या पूरी तरह समाप्त नहीं हो पाई है। ग्रामीण इलाकों में आज भी बड़ी आबादी खाद्य असुरक्षा का सामना कर रही है। कृषि उत्पादन बढ़ने के बावजूद वितरण प्रणाली में असमानता और भंडारण से जुड़ी समस्याएं खाद्य सुरक्षा को कमजोर बनाती हैं। 2030 तक यदि इन कमियों को दूर नहीं किया गया, तो स्थिति और जटिल हो सकती है।

जलवायु परिवर्तन खाद्य सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा बनता जा रहा है। अनियमित बारिश, सूखा, बाढ़ और तापमान में वृद्धि से फसल उत्पादन प्रभावित हो रहा है। कई राज्यों में किसान पहले ही मौसम की मार झेल रहे हैं, जिससे उत्पादन लागत बढ़ रही है और उपज घट रही है। 2030 तक यदि कृषि को जलवायु अनुकूल नहीं बनाया गया, तो खाद्यान्न उत्पादन पर गहरा असर पड़ सकता है।

शहरीकरण और औद्योगीकरण भी खाद्य सुरक्षा को प्रभावित कर रहे हैं। कृषि भूमि का तेजी से गैर कृषि उपयोग में बदलना उत्पादन क्षमता को सीमित कर रहा है। वहीं शहरों में बढ़ती आबादी के कारण खाद्य मांग में तेजी से वृद्धि हो रही है। यह असंतुलन भविष्य में खाद्य आपूर्ति श्रृंखला पर भारी दबाव डाल सकता है।

सरकारी योजनाएं जैसे सार्वजनिक वितरण प्रणाली, पोषण अभियान और किसान सहायता कार्यक्रम खाद्य सुरक्षा को बनाए रखने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। हालांकि 2030 तक इन योजनाओं को और अधिक प्रभावी, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने की आवश्यकता होगी। डिजिटल निगरानी, बेहतर भंडारण व्यवस्था और किसानों को आधुनिक तकनीक से जोड़ना खाद्य सुरक्षा को मजबूत कर सकता है।

पोषण की गुणवत्ता भी खाद्य सुरक्षा का एक महत्वपूर्ण पहलू है। केवल पेट भरना ही पर्याप्त नहीं, बल्कि संतुलित और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना भी जरूरी है। बच्चों और महिलाओं में कुपोषण की समस्या अभी भी चिंता का विषय बनी हुई है। 2030 तक यदि पोषण आधारित नीतियों पर विशेष ध्यान नहीं दिया गया, तो इसका असर देश के मानव संसाधन विकास पर पड़ेगा।

2030 में भारत की खाद्य सुरक्षा इस बात पर निर्भर करेगी कि देश कृषि, जल प्रबंधन, वितरण प्रणाली और पोषण नीति को कितनी मजबूती से एक साथ आगे बढ़ाता है। सही नीतियों और समय पर किए गए सुधारों से भारत बढ़ती आबादी का पेट भरने में सफल हो सकता है, लेकिन लापरवाही इस चुनौती को एक बड़े संकट में बदल सकती है।

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