दिल्ली गैस चेंबर में तब्दील: प्रदूषण और कोहरे से जनजीवन अस्तव्यस्त
मोहित गौतम (दिल्ली) : दिल्ली और एनसीआर क्षेत्र एक बार फिर गंभीर वायु प्रदूषण और घने कोहरे की चपेट में आ गया है, जिससे राजधानी का जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। आसमान में छाए धुएं और जहरीली हवा ने पूरे शहर को गैस चेंबर जैसी स्थिति में पहुंचा दिया है। सड़कों पर दृश्यता बेहद कम हो गई है और लोगों को सांस लेने में तकलीफ, आंखों में जलन और गले में खराश जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। प्रदूषण का स्तर इतना अधिक है कि सामान्य गतिविधियां भी जोखिम भरी बनती जा रही हैं।
इस गंभीर स्थिति का सबसे बड़ा असर हवाई यातायात पर देखने को मिला है। घने कोहरे और कम दृश्यता के कारण इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर बड़ी संख्या में उड़ानें रद्द करनी पड़ीं। सैकड़ों यात्रियों को एयरपोर्ट पर घंटों इंतजार करना पड़ा, जबकि कई लोगों की यात्रा योजनाएं पूरी तरह बिगड़ गईं। कुछ उड़ानों को अन्य हवाई अड्डों पर डायवर्ट किया गया, जिससे यात्रियों को अतिरिक्त असुविधा का सामना करना पड़ा। एयरलाइंस को सुरक्षा कारणों से यह कठोर कदम उठाने पड़े।

प्रदूषण का स्तर कई इलाकों में गंभीर श्रेणी को पार कर चुका है। हवा में मौजूद सूक्ष्म कण मानव स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक माने जाते हैं। डॉक्टरों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की हवा में लंबे समय तक रहने से फेफड़ों, हृदय और आंखों से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों के लिए यह स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक है। अस्पतालों में सांस संबंधी समस्याओं वाले मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है।
सड़क यातायात भी इस स्थिति से अछूता नहीं रहा। सुबह और रात के समय दृश्यता बहुत कम होने के कारण वाहन चालकों को भारी परेशानी हुई। कई जगहों पर दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया है और ट्रैफिक की रफ्तार बेहद धीमी हो गई है। कार्यालय जाने वाले लोग, छात्र और आम नागरिक सभी इस संकट से प्रभावित हैं। लोगों को मास्क पहनने और गैर जरूरी बाहर निकलने से बचने की सलाह दी जा रही है।
सरकार और प्रशासन की ओर से प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए कुछ आपात कदम लागू किए गए हैं। निर्माण कार्यों पर रोक, कुछ उद्योगों पर पाबंदी और वाहनों के उपयोग को सीमित करने जैसे उपाय किए जा रहे हैं। स्कूलों को हाइब्रिड मोड में चलाने और लोगों को घर से काम करने की सलाह भी दी गई है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि ये उपाय अस्थायी राहत दे सकते हैं, लेकिन स्थायी समाधान के लिए दीर्घकालिक नीति और सख्त क्रियान्वयन जरूरी है।
पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार दिल्ली में हर साल यह समस्या गंभीर रूप ले लेती है, जिसका कारण वाहनों का धुआं, निर्माण गतिविधियां, पराली जलाना और मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियां हैं। जब ठंडी हवा और नमी प्रदूषकों को ऊपर जाने से रोक देती है, तब स्मॉग की परत बन जाती है जो कई दिनों तक बनी रहती है। यह केवल दिल्ली की समस्या नहीं, बल्कि पूरे उत्तर भारत के लिए एक चेतावनी है।
इस संकट ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या केवल आपातकालीन उपाय पर्याप्त हैं या अब स्थायी और ठोस कदम उठाने का समय आ गया है। स्वच्छ ऊर्जा, सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा, हरित क्षेत्र का विस्तार और सख्त प्रदूषण नियंत्रण कानून ही इस समस्या का दीर्घकालिक समाधान हो सकते हैं। जब तक इन पर गंभीरता से अमल नहीं होता, तब तक दिल्ली के लोग हर साल इसी तरह जहरीली हवा में सांस लेने को मजबूर रहेंगे।