केंद्र सरकार का बड़ा फैसला, नई माइनिंग पर पूरी तरह रोक
मोहित गौतम (दिल्ली) : अरावली पर्वतमाला को बचाने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा और दूरगामी फैसला लिया है। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने स्पष्ट निर्देश जारी करते हुए कहा है कि अरावली रेंज में अब किसी भी प्रकार के नए माइनिंग पट्टे नहीं दिए जाएंगे। यह फैसला देश की सबसे प्राचीन पर्वतमालाओं में से एक अरावली को अवैध खनन और पर्यावरणीय क्षति से बचाने के उद्देश्य से लिया गया है।
अरावली पर्वतमाला गुजरात से लेकर राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली एनसीआर तक फैली हुई है। यह क्षेत्र न केवल जैव विविधता के लिए अहम है, बल्कि भूजल संरक्षण, प्रदूषण नियंत्रण और जलवायु संतुलन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, अरावली का क्षरण दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण और जल संकट का बड़ा कारण रहा है।

सरकार के इस फैसले के तहत राज्यों को निर्देश दिए गए हैं कि वे किसी भी नए खनन प्रस्ताव को मंजूरी न दें। साथ ही, अरावली क्षेत्र के लिए एक दीर्घकालिक संरक्षण और प्रबंधन योजना तैयार करने पर भी जोर दिया गया है। इसमें अवैध खनन पर सख्ती, हरित क्षेत्र का विस्तार और पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने के उपाय शामिल होंगे।
हाल के वर्षों में अरावली में खनन को लेकर लगातार विवाद सामने आते रहे हैं। पर्यावरणविदों का कहना है कि अनियंत्रित माइनिंग से जंगल नष्ट हुए, जल स्रोत सूखे और स्थानीय तापमान में वृद्धि हुई। ऐसे में केंद्र सरकार का यह कदम पर्यावरण सुरक्षा की दिशा में एक निर्णायक पहल माना जा रहा है।
पर्यावरण संगठनों और विशेषज्ञों ने इस फैसले का स्वागत किया है। उनका मानना है कि यदि इस आदेश को सख्ती से लागू किया गया, तो आने वाले वर्षों में दिल्ली-एनसीआर और आसपास के इलाकों को स्वच्छ हवा, बेहतर जल स्तर और संतुलित पर्यावरण का लाभ मिल सकता है।
कुल मिलाकर, अरावली में माइनिंग पर प्रतिबंध न केवल एक नीतिगत फैसला है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक धरोहर को सुरक्षित रखने की दिशा में एक मजबूत कदम भी है।