क्या भारत में ‘डेटा ही नया तेल’ बन चुका है? आम आदमी की जानकारी कितनी सुरक्षित है?
मोहित गौतम (दिल्ली) : डिजिटल युग में “डेटा ही नया तेल है” यह बात तेजी से सच होती दिखाई दे रही है। जिस तरह औद्योगिक क्रांति के समय तेल सबसे कीमती संसाधन माना जाता था, उसी तरह आज के दौर में डेटा सबसे मूल्यवान संपत्ति बन चुका है। भारत में इंटरनेट और स्मार्टफोन के बढ़ते उपयोग के साथ हर दिन करोड़ों लोग ऑनलाइन सेवाओं का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे बड़ी मात्रा में व्यक्तिगत जानकारी लगातार इकट्ठा हो रही है। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि यह डेटा आखिर किसके पास जा रहा है और यह कितना सुरक्षित है।
आज के समय में मोबाइल ऐप्स, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, ऑनलाइन शॉपिंग और डिजिटल पेमेंट सिस्टम के जरिए यूजर्स की व्यक्तिगत जानकारी लगातार एकत्र की जाती है। इसमें नाम, मोबाइल नंबर, लोकेशन, ब्राउज़िंग आदतें और यहां तक कि बैंकिंग से जुड़ी जानकारी भी शामिल होती है। कंपनियां इस डेटा का उपयोग अपने बिजनेस को बेहतर बनाने, विज्ञापन दिखाने और यूजर्स के व्यवहार को समझने के लिए करती हैं। लेकिन कई बार यही डेटा गलत हाथों में पहुंचने का खतरा भी पैदा करता है।
भारत में डेटा सुरक्षा को लेकर जागरूकता धीरे-धीरे बढ़ रही है, लेकिन अभी भी यह एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। साइबर हमले, डेटा लीक और फिशिंग जैसे मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है। कई बार यूजर्स बिना शर्तें पढ़े ही ऐप्स को अपनी जानकारी तक पहुंच दे देते हैं, जिससे उनकी प्राइवेसी खतरे में पड़ सकती है। इसके अलावा, कमजोर पासवर्ड और असुरक्षित नेटवर्क का उपयोग भी जोखिम को बढ़ाता है।
सरकार ने डेटा सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए कुछ कदम उठाए हैं और नियमों को सख्त करने की दिशा में प्रयास जारी हैं। हालांकि, केवल कानून बनाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसका सही तरीके से पालन और लोगों में जागरूकता भी उतनी ही जरूरी है। जब तक यूजर्स खुद सतर्क नहीं होंगे, तब तक डेटा सुरक्षा पूरी तरह सुनिश्चित नहीं की जा सकती।
आम नागरिक के लिए यह जरूरी है कि वह डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग करते समय सावधानी बरते। मजबूत पासवर्ड का उपयोग करना, अनजान लिंक पर क्लिक न करना और ऐप्स को केवल जरूरी अनुमति देना जैसे छोटे कदम भी बड़े जोखिम को कम कर सकते हैं। इसके साथ ही, समय-समय पर अपनी डिजिटल गतिविधियों की समीक्षा करना भी आवश्यक है।
अंततः यह कहा जा सकता है कि भारत में डेटा तेजी से एक मूल्यवान संसाधन बन चुका है, लेकिन इसके साथ जुड़े जोखिम भी उतने ही गंभीर हैं। यदि सुरक्षा और जागरूकता को प्राथमिकता दी जाए, तो डेटा का सही उपयोग देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। अन्यथा, यह एक बड़ा खतरा भी बन सकता है।