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UAE दौरे पर प्रधानमंत्री मोदी का हाई-प्रोफाइल स्वागत, रक्षा और ऊर्जा सहयोग पर बढ़ा फोकस

मोहित गौतम (दिल्ली) : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया संयुक्त अरब अमीरात दौरे ने एक बार फिर भारत और खाड़ी देशों के मजबूत होते संबंधों को वैश्विक चर्चा में ला दिया है। प्रधानमंत्री के विमान के यूएई एयरस्पेस में प्रवेश करते ही सुरक्षा एस्कॉर्ट के रूप में लड़ाकू विमानों की मौजूदगी ने इस यात्रा को विशेष महत्व दे दिया। इस घटनाक्रम को दोनों देशों के बीच बढ़ते रणनीतिक और कूटनीतिक विश्वास के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

दौरे के दौरान भारत और यूएई के बीच ऊर्जा, व्यापार, निवेश और रक्षा सहयोग से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। विशेष रूप से एलपीजी और ऊर्जा आपूर्ति से जुड़े समझौतों को दोनों देशों के आर्थिक संबंधों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि खाड़ी क्षेत्र में बदलते भू-राजनीतिक माहौल के बीच भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा और रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

हाल के महीनों में मध्य पूर्व क्षेत्र में बढ़ते तनाव और सुरक्षा चुनौतियों के कारण भारत और यूएई के बीच रक्षा सहयोग का महत्व भी बढ़ा है। दोनों देश समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद विरोधी सहयोग और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे मुद्दों पर लगातार संवाद बनाए हुए हैं। इसी वजह से प्रधानमंत्री की यह यात्रा केवल आर्थिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि रणनीतिक स्तर पर भी अहम मानी जा रही है।

विश्लेषकों के अनुसार भारत और यूएई के संबंध अब पारंपरिक व्यापारिक सहयोग से आगे बढ़कर व्यापक रणनीतिक साझेदारी का रूप ले चुके हैं। इंफ्रास्ट्रक्चर, डिजिटल टेक्नोलॉजी, ऊर्जा और रक्षा जैसे क्षेत्रों में बढ़ता सहयोग आने वाले वर्षों में दोनों देशों के रिश्तों को नई दिशा दे सकता है।

इस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने क्षेत्रीय शांति और स्थिरता पर भी जोर दिया। मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच भारत लगातार संतुलित कूटनीतिक रुख अपनाने की कोशिश कर रहा है। यही कारण है कि भारत की भूमिका अब केवल एक व्यापारिक साझेदार तक सीमित नहीं रही, बल्कि उसे क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक संवाद के महत्वपूर्ण भागीदार के रूप में भी देखा जा रहा है।

अंत में यह कहा जा सकता है that प्रधानमंत्री मोदी का यूएई दौरा केवल एक औपचारिक कूटनीतिक यात्रा नहीं, बल्कि भारत की बदलती वैश्विक रणनीति और खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते प्रभाव का संकेत भी है। आने वाले समय में यह साझेदारी ऊर्जा, सुरक्षा और व्यापार के क्षेत्र में और अधिक मजबूत होती दिखाई दे सकती है।

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